पापी पोर्न का जवाब है…, ब्लू फिल्म देखकर बौखला रहे हैं छात्र

युवा वर्ग में पोर्न यानी अश्लील फिल्म देखने की लत बढ़ती जा रही है। चाहे वह छात्र हो या कामकाजी वर्ग का व्यक्ति सभी में ब्लू फिल्म देखने का चस्का बढ़ता जा रहा है। मुंबई के जूनियर व डिग्री कॉलेजों में पढ़नेवाले छात्र और छात्राएं भी इससे अछूते नहीं। मुंबई की एक चैरिटेबल संस्था `रेस्क्यू रिसर्च एंड ट्रेनिंग’ ने छात्रों में पोर्न के बारे में छात्रों की राय जानी। इस सर्वे में ३० जूनियर व डिग्री कॉलेज के ५०० छात्रों को प्रश्नावली बांटी गई। छात्रों को बिगाड़नेवाले पापी पोर्न के बारे हैरान कर देनेवाले जवाब प्राप्त हुए। कई छात्रों ने बताया कि ब्लू फिल्म देखकर वे बौखला जाते हैं। कई अपने गर्लप्रâेंड के साथ तो कई सेक्स वर्कर्स के साथ फिल्म में दर्शाए गए अप्राकृतिक सेक्स को दोहराते हैं। छात्रों ने यह भी कबूला कि हिंसक पोर्न देखने के बाद उसी दृश्य को दोहराने की बात मन में आती है। उदाहरण के तौर पर रेप। `रेस्क्यू रिसर्च एंड ट्रेनिंग चैरिटेबल ट्रस्ट’ के सीईओ अभिषेक क्लिफोर्ड ने कहा कि पोर्न हमारी संस्कृति नहीं है। ब्लू फिल्में हमारी पीढ़ी को बर्बाद कर रही हैं। इस अध्ययन में ४० प्रतिशत छात्रों द्वारा सप्ताह में औसतन ४० रेप पोर्न वीडियो देखे जाते हैं यानी रोजाना २ मिलियन पोर्न वीडियो मुंबई के छात्र देखते हैं। हमारी शिक्षा मंत्री से जल्द ही इस संदर्भ में मुलाकात होगी। इसी के साथ हमने स्कूल के प्राध्यापकों को भी उक्त सर्वे की कॉपी दी और छात्रों को पोर्न से होनेवाली मानसिक, शारीरिक समस्याओं के बारे में अवगत करवाया है।
 घातक परिणाम
५०० छात्रों पर किए गए इस अध्ययन में १६ से २२ वर्षीय छात्रों का समावेश है, जिसमें १८८ लड़के व ३४५ लड़कियां हैं। पोर्न देखने के कई घातक परिणाम अध्ययन के जरिए प्रस्तुत किए गए हैं।
 सेक्स और गर्भपात
इस अध्ययन के मुताबिक ३३ प्रतिशत लड़के और २४ प्रतिशत लड़कियां सेक्सटिंग करते हैं यानी बेहतर और ज्यादा जुड़ाव के लिए अपनी नग्न तस्वीरें एक दूसरे को भेजते हैं। ३५ प्रतिशत छात्र सेक्स का अनुभव ले चुके हैं। कुछ प्राध्यापकों ने यह बात भी कही कि १६ से १७ वर्ष के छात्र शारीरिक संबंध बनाने में सक्रिय हैं। अनैतिक संबंध बनाने के बाद गर्भ निरोधक दवाइयों का सेवन किया जाता है। छात्रों को यह जानकर हैरानी होगी कि एक वर्ष के संबंध में गर्भ निरोधक नुस्खे केवल ८५ फीसदी ही सफल होते हैं। इससे यह साबित होता है कि लगभग १० प्रतिशत लड़कियां कॉलेज में ही गर्भवती होती हैं और फिर उन्हें गर्भपात करवाना पड़ता है।
 रोजाना छात्र देखते हैं २० लाख वीडियो
अध्ययन में ४० प्रतिशत लड़कों ने कबूला कि वे अपने मोबाइल पर सप्ताह में औसतन ४० रेप वीडियो देखते हैं यानी मुंबई के युवा छात्र रोजाना २० लाख पोर्न देखते हैं। २५ प्रतिशत छात्रों का कहना है कि हिंसक पोर्न देखने के बाद उन्हें भी गैंग रेप करने की इच्छा होती है। ४१ प्रतिशत लड़कियां सप्ताह में ४ घंटे पोर्न देखती हैं।
 अननेचुरल सेक्स जान को जोखिम
`रेस्क्यू’ के मुताबिक ५६ प्रतिशत पोर्न वेबसाइट पर अननेचुरल सेक्स कंटेंट डाले जाते हैं। ६७ प्रतिशत लड़कों ने कहा कि पोर्न देखने के बाद वे भी अननेचुरल सेक्स के लिए प्रेरित होते हैं। इस तरीके से सेक्स करनेवालों में एचआईवी और यौन रोग होने का खतरा १०० गुना बढ़ जाता है। इससे आदमी की आयु भी १४ से २० साल घट जाती है। ७० प्रतिशत छात्रों ने होमोसेक्सुअल बर्ताव का समर्थन नहीं किया है।
 सेक्स के लिए रेड लाइट पहुंचे छात्र
अध्ययन में ५९ प्रतिशत छात्रों ने कहा कि पोर्न देखने के बाद उन्हें देह व्यापार करनेवाली लड़कियों के साथ संबंध बनाने की इच्छा होती है। २६ प्रतिशत छात्रों ने रेड लाइट एरिया में सेक्स के लिए जाने और पैसे खर्च करने की बात कबूली। इसके पीछे यह कारण है कि जब उन्हें अननेचुरल सेक्स करने को नहीं मिलता तो वे पैसे देकर देह व्यापार करनेवाली के पास जाते हैं। हैरान करनेवाली बात यह है कि गरीब घर की ८ में से १ छात्रा ने पैसे के लिए सेक्स करने की बात कबूली है।
 कैसे बचें?
`रेस्क्यू’ द्वारा ८० कॉलेजों में १३० साइबर एथिक सेमिनार लिए गए। छात्रों को यूथ रिलेशनशिप पर शिक्षा देने की जरूरत है। अपने बच्चों को पोर्न से दूर रखने के लिए ऐप का इस्तेमाल करें। कानून में सख्ती होनी जरूरी है। सरकार के निर्णय के बाद मोबाइल इंटरनेट से पोर्न वेबसाइट को एक्सेस नहीं है लेकिन वाईफाई से अभी पोर्न एक्सेस मुमकिन है। इसे रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाना चाहिए।
 कहीं आप पोर्न एडिक्ट तो नहीं?
डॉ. सागर मूंदड़ा ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति एक सप्ताह में १२ घंटे से भी अधिक का समय पोर्न मूवी देखने में गुजारता है। यदि आपको अपने पार्टनर के साथ सामान्य सेक्स करने में दिक्कतें आती हैं तो या फिर आप दोस्त और परिवारवालों के साथ समय बिताने से अच्छा पोर्न देखना पसंद करते हैं। यदि व्यस्त समय में भी आपके दिमाग में पोर्न देखने का मन कर रहा है तो आप पोर्न एडिक्ट हो सकते हैं।
 डॉक्टरों की राय
डॉ. यूसुफ माचिसवाला ने कहा कि युवाओं में पोर्न का क्रेज काफी है। पोर्न के इस लत के कारण युवा ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाते, नींद नहीं आती और रोजमर्रा का काम भी ठीक से नहीं कर पाते हैं। उक्त मरीजों की काउंसलिंग की जाती है। दवा के तौर पर एंटी डिप्रेशन टेबलेट दी जाती है। व्यायाम करने के लिए भी सलाह दी जाती है। कई मरीज का मानसिक संतुलन इतना बिगड़ जाता है कि उन्हें एडमिट कर इलेक्ट्रिक शॉक भी दिया जाता है।