पायल तड़वी आत्महत्या मामला, नायर में पहले भी हुई ४ बार रैगिंग

डॉक्टर पायल तड़वी खुदकुशी मामले में रोज नई-नई जानकारी सामने आ रही है। पायल द्वारा खुदकुशी से पहले लिखे गए सुसाइड नोट की तस्वीर पुलिस को पायल के मोबाइल फोन से मिल चुकी है। सुसाइड नोट में जातीय टिप्पणी के उल्लेख के साथ-साथ उन ४ डॉक्टरों के बारे में भी लिखा गया है, जिन्हें पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। अब नायर अस्पताल में रैिंगग को लेकर जो ताजा जानकारी सामने आई है, वह बेहद चौंकानेवाली है। जानकारी ये है कि पायल से पहले भी नायर में छात्र रैगिंग का शिकार होते रहे हैं। परंतु छात्र शिकायत करने आगे नहीं आते थे क्योंकि शिकायत के बाद भी कॉलेज प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता था। अतीत में रैगिंग से संबंधित ४ शिकायतों से ऐसा स्पष्ट हो गया है।
बता दें कि नायर अस्पताल की प्रशिक्षु डॉ.पायल तड़वी की खुदकुशी से पहले चार छात्रों ने कॉलेज प्रशासन से रैगिंग की शिकायत की थी लेकिन कॉलेज प्रशासन ने लीपा-पोती करके मामलों को रफा-दफा कर दिया। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख को अस्पताल प्रशासन ने यह जानकारी रैगिंग के संबंध में दायर की गई एक आरटीआई के जवाब में दिया है। अस्पताल प्रशासन ने बताया है कि विगत पांच वर्षों में ४ छात्रों ने रैगिंग की शिकायत दर्ज कराई थी। पहली शिकायत वर्ष २०१४ में बैचलर ऑफ मेडिसिन और बैचलर ऑफ सर्जरी विभाग के दो छात्रों ने द्वितीय वर्ष एमबीबीएस के विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज कराई थी। इसके बाद वर्ष २०१५ में द्वितीय वर्ष फिजियोलॉजी विभाग के डॉक्टर ने और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के दो निवासी डॉक्टरों ने रैगिंग विरोधी समिति के पास शिकायत दर्ज कराई थी। इसी तरह वर्ष २०१८ में भी रैगिंग की शिकायत आई थी। ये तमाम शिकायतें टोल प्रâी नंबर पर आई थीं। नायर अस्पताल प्रशासन रैगिंग रोकने के लिए वर्ष २०१३ से अब तक २१ बैठकें कर चुका है लेकिन किसी प्रकरण में किसी छात्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। समिति ने एक विद्यार्थी से सिर्फ चर्चा करके मामले को रफा-दफा कर दिया। जबकि द्वितीय वर्ष एमबीबीएस के ४ विद्यार्थियों को एक-एक महीने के लिए निलंबित किया था। इसी तरह एक अन्य मामले में २ विद्यार्थियों को ६-६ महीने निलंबित तथा २ विद्यार्थियों को हॉस्टल से हमेशा के लिए बर्खास्त किया था।