पालघर में आई बाढ़ तो नहीं डूबेगा घर

बाढ़ का पानी घर में न आए इसलिए पालघर जिले के मिलिंद पाटील नामक स्थानीय गांव के एक निवासी ने वह काम कर दिखाया, जो पालघर जिले के लोगों में उत्सुकता का विषय बना हुआ है। बता दें कि पालघर जिले में हर साल कई घर बरसात के मौसम में बाढ़ के पानी से डूब जाते हैं। हर साल तीन-तीन दिन पूरा परिवार पानी में रहने को मजबूर रहता है। बरसात में बाढ़ का पानी घर में घुस जाने से घर की हालत ऐसी हो जाती थी, जैसे घर न हो नाला हो। पालघर जिले के मासवन गांव के मिलिंद पाटील जिनका घर आर्यन स्कूल के पीछे है। यह घर मिलिंद पाटील के पिता ने १९६९ में बनाया था। २,८०० वर्गफुट का था। अपने परिवार की दुर्दशा हर बरसात के पानी में देखते थे। सोचते-सोचते उन्हें याद आया की चेन्नई में भी यही परेशानी है, उन्होंने गुगल पर इसका उपाय सोचा। वहां से उन्हें जानकारी मिली कि चेन्नई में एक ठेकेदार ने इस तरह की समस्या से निजात दिलाया है। मिलिंद पाटील चेन्नई गए और वहां उन्होंने श्रीराम बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक विकास सिसोदिया से चर्चा की। यह हरियाणा की कंपनी है। पाटील का यह घर भी ५० साल पुराना हो चला था। पाटील ने चेन्नई के ठेकेदार से बात की और उस ठेकेदार ने कहा कि ठीक है आता हूं और देखता हूं। मिलिंद पाटील के मुताबिक चेन्नई के उस कंपनी ने यहां आकर मकान का सर्वेक्षण किया और १० जनवरी से काम शुरू किया। १ महीने में बाढ़ से बचने के उपायवाला घर का निर्माण कर दिया। जमीन से ५ फुट ऊपर २ फ्लोर का यह मजबूत घर आज पालघर के लोगों के बीच उत्सुकता का विषय बना हुआ। १६ मजदूर १८९ जैक पर यह घर खड़ा है। घर का वजन ९५ टन है जबकि जैक की क्षमता १४५० टन की है। सभी लोग उस घर को देखने के लिए दूर-दूर से आ रहे हैं जबकि मिलिंद पाटील बड़े ही शांत भाव से कहते हैं कि पहले तो मैं बहुत डरा हुआ था लेकिन अब निश्चिंत हूं। अब बरसात के मौसम यह घर पानी से कितना सुरक्षित रहेगा? यह अब तो आनेवाला समय ही बताएगा।
१ महीने में तैयार हुआ मकान
चेन्नई के ठेकेदार ने बनाया
१८९ जैक पर टिका है