पाव कर रहा है ‘घाव’

गरीबों की भूख का सहारा और अमीरों की लज्जत पाव के दाम में बढ़ोत्तरी खलने लगी है। इसका असर लज्जतवालों पर भले ही न पड़े लेकिन पेट की भूख मिटाने वाले गरीब और मध्यमर्गीय लोगों पर इसका असर पड़ने लगा है। नतीजतन उल्हासनगर में पाव अब ‘घाव’ करने लगा है।
पाव के लिए लगनेवाली सामग्री के दामों में बढ़ोत्तरी की मार पाव पर पड़ गई है, जिसके कारण बेकरीवालों ने लकड़ी, गैस, घी, मैदा का हवाला देते हुए पाव को २५ फीसदी के करीब महंगा कर दिया। इसका खामियाजा नास्ता बनाने व नास्ता करनेवालों को उठाना पड़ रहा है। उल्हासनगर में बेकरीवाले ४ पाव की लादी जो पहले १२ रुपए में बेचते थे वह अब १६ रुपए में बेच रहे हैं। इसके अलावा ३ रुपए ब्रेड पैकेट पर भी बढ़ा दिया गया है। पहले ब्रेड २२ रुपए का था अब २५ रुपए में बिक रहा है। पहले सैंडविच २० रुपए व दाल ब्रेड २५ रुपए में था जिसका दाम अब प्रति प्लेट एक रुपए से २ रुपए बढ़ा दिया गया है।
कमला नेहरू नगर के लीखाद निषाद उर्फ चौधरी का कहना है कि पाव के दाम बढ़ने से नाश्ता की खपत पर असर पड़ा है। इसी तरह से खेमानी परिसर में दाल सैंडविच बेचनेवाले हरेश व महेश नामक भाइयों का भी रोना है कि पाव महंगा होने से उनके धंधे पर काफी असर पड़ा है। उल्हासनगर में पाव की मार करीबन ३० हजार नाश्ता व्यवसाय करनेवालों पर पड़ा है।
उल्हासनगर के बेकरीवालों को मैदा आपूर्ति करनेवाले व्यापारी राजेश पाठक का भी रोना है कि पाव के भाव बढ़ने से मैदे की खपत पर भी विपरीत असर पड़ा है। ‘उल्हासनगर बेकरी एसोसिएशन’ के अध्यक्ष बच्चामल भगवानदास वलेच्छा का कहना है कि मैदा, घी, लकड़ी तथा गैस कीमतों में बढ़ोत्तरी, मजदूरों के रोज के वेतन में बढ़ोत्तरी के चलते यह व्यवसाय घाटे में चल रहा था। इस कारण पाव के दामों में २५ फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है। इस बढ़ोत्तरी से बेकरीवालों के भी धंधे पर असर पड़ा है।