पिक्चर की टिकट ने रोका ‘तीन तलाक’

‘भरोसा सेल’ का भारी काम
घरेलू झगड़ों का होता है निपटारा
पुलिस से संबंधित मामलों का भी होता है हल
‘भरोसा’ पर बढ़ रहा है भरोसा
कौन कहता है कि विवाद का निपटारा सिर्फ कानून से ही होता है। हम एक ऐसे नए जोड़े (पति-पत्नी) के बारे में बात कर रहे हैं, जो तलाक लेकर अलग-अलग जिंदगी जीना चाहते थे। दोनों को फिल्म देखने का टिकट देकर उनका मन बदल दिया। फिल्म देखने के बाद दोनों तलाक लेने की जिद छोड़कर साथ रहने का पैâसला कर लिया। ये संभव हो पाया भाइंदर के पुलिस अधिकारी अतुल कुलकर्णी के ‘भरोसा सेल’ की पहल से।
भाइंदर पुलिस में पदस्थापित आईपीएस अधिकारी अतुल कुलकर्णी के ऑफिस में हर शनिवार ‘भरोसा सेल’ की बैठक होती है। इस बैठक में स्थानीय लोगों की समस्या की सुनवाई, घरेलू झगड़े, पति-पत्नी के आपसी विवाद जैसे कई मुद्दों का निपटारा किया जाता है। इस व्यवस्था पर अब आम लोगों का विश्वास बढ़ता जा रहा है। पिछले एक वर्षों से मीरा-भाइंदर में पुलिस की ‘भरोसा सेल’ से कई परिवार उजड़ने से बच गए। भाइंदर में पदस्थापित सहायक पुलिस अधीक्षक अतुल कुलकर्णी अपनी स्वच्छ छवि और कार्य करने की शैली को लेकर चर्चा में रहते हैं। कुलकर्णी पिछले एक वर्षों से ‘भरोसा सेल’ की बैठक हर शनिवार को भाइंदर-पश्चिम स्थित अपने ऑफिस में लगाते हैं, जिसमें समाज के प्रबुद्ध लोग भी शामिल होते हैं।
यहां पर कुलकर्णी खुद सबकी समस्या सुनते हैं और दोनों पार्टी को समझा-बुझा कर मामले को हल करते हैं। ‘भरोसा सेल’ में सभी तरह के मामले आते हैं। पुलिस से शिकायत, पारिवारिक शिकायत, पति-पत्नी विवाद, बूढ़े मां-बाप का अपने बच्चों से शिकायत आदि। हाल ही में सेल में भाइंदर निवासी एक पति-पत्नी की आपसी झगड़े की शिकायत आई थी। विवाद इतना बढ़ गया था कि मामला तलाक लेने तक पहुंच गया था। कुलकर्णी ने अपनी टीम के साथ दोनों की समस्या सुनी और दोनों के बीच की गलतफहमियों को दूर कर पिक्चर का टिकट दिया। दोनों को साथ में जाकर पिक्चर देखने को कहा। जब दोनों पिक्चर देखकर वापस आए तो उनकी तलाक लेने की जिद खत्म हो चुकी थी और साथ रहने की सहमति बन गई थी। ऐसे कई मामलों के हल होने से लोगों का पुलिस ‘भरोसा सेल’ पर भरोसा बढ़ता जा रहा है।