" /> पितरों के प्रति सम्मान का पर्व है श्राद्ध

पितरों के प्रति सम्मान का पर्व है श्राद्ध

पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके तर्पण के निमित्त श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध का अर्थ श्रद्धापूर्वक अपने पितरों के प्रति सम्मान प्रकट करने से है। श्राद्ध पक्ष में अपने पूर्वजों को एक विशेष समय में १५ दिन की अवधि तक सम्मान दिया जाता है। इस अवधि को पितृ पक्ष अर्थात श्राद्ध पक्ष या महालय भी कहते हैं। हिंदू धर्म में श्राद्ध का विशेष महत्व होता है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए पितृ पक्ष में तर्पण और पिंडदान को सर्वोत्तम माना गया है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य का प्रवेश कन्या राशि में होता है तो उसी दौरान पितृ पक्ष मनाया जाता है, जिसमें पितृ तर्पण किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है अर्थात इस साल का पितृ पक्ष ०१ सितंबर से शुरू होकर १७ सितंबर २०२० तक चलेगा। यानी कि इस साल पितृ पक्ष की कुल अवधि १७ दिनों की होगी। इस बार पितृ पक्ष का आगमन राहु के नक्षत्र शतभिषा में हो रहा है और राहु के नक्षत्र में इस पक्ष का आरंभ होना ज्योतिष की नजर में बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। पूर्णिमा तिथि १ सितंबर २०२० की सुबह ०९ बजकर ३८ मिनट से शुरू होगी, जो २ सितंबर २०२० को सुबह १० बजकर ५३ मिनट तक रहेगी, वहीं इस वर्ष ०४ सिंतबर २०२० शुक्रवार को कोई भी तिथि श्राद्ध नहीं होगा। परंतु जो लोग किसी कारणवश ०३ सितंबर को द्वितीया का श्राद्ध न कर सकें वे ०४ सितंबर को भी अपराह्न ०१:४३ बजे से २:२४ बजे तक श्राद्ध कार्य कर सकते हैं। वैसे महालय में श्राद्ध कर्म इस प्रकार किए जाएंगे।
१. प्रोष्ठपदी (पूर्णिमा) श्राद्ध: पूर्णिमा का श्राद्ध दिनांक ०१ सितंबर २०२० (मंगलवार) को ही मान्य होगा, क्योंकि यह पार्वण श्राद्ध है, पूर्णिमा का श्राद्ध पूर्णिमा को ही होना चाहिए। शास्त्र नियम के अनुसार अपराह्न व्यापिनी भाद्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन इसे करने का विधान है। इस वर्ष यह पूर्णिमा ०१ सितंबर, २०२० (मंगलवार) को प्रातः ९:३९ बजे के बाद अपराह्न व्यापिनी है।
२. प्रतिपदा का श्राद्ध: इस वर्ष ०२ सिंतबर, २०२० (बुधवार) को प्रतिपदा का श्राद्ध मान्य होगा क्योंकि इस दिन प्रतिपदा प्रातः १०:५२ बजे के बाद अपराह्न व्यापिनी है तथा ०३ सितंबर २०२०, गुरुवार को प्रतिपदा अपराह्न से पूर्व १२:२७ बजे ही समाप्त हो जाती है। इस दिन अपराह्न काल अपराह्न में १:३७ बजे से सांय ४:०८ बजे तक रहेगा।
३. द्वितीया का महालय श्राद्ध: आश्विन कृष्ण पक्ष (पितृ-पक्ष) में आत्मीय मृत व्यक्ति की जो तिथि आये उस तिथि में पार्वण श्राद्ध करने का विधान है। पार्वण श्राद्ध में पिता, पितामह, प्रपितामह, सपत्नीक अर्थात माता, दादा और परदादी सहित छ: जनों का श्राद्ध होता है, इन्हें अपराह्न-व्यापिनी मृत्यु तिथि के दिन ही करना चाहिए। शास्त्र के अनुसार यदि मृत्यु तिथि अपराह्न काल को दो दिन असमान रूप से व्याप्त हो अर्थात एक दिन अधिक दूसरे दिन कम समय के लिए व्याप्त करे तो वहां अधिक अपराह्न काल- व्याप्तिवाले दिन श्राद्ध किया जाता है। द्वितीया का श्राद्ध इस वर्ष ०३ सितंबर, २०२० (गुरुवार) को ही मान्य होगा। अपराह्न व्यापिनी आश्विन कृष्ण द्वितीया को यह श्राद्ध करने का शास्त्र नियम है। इस वर्ष द्वितीया तिथि ०३ सितंबर, २०२० को अपराह्न १२:२७ बजे से प्रारंभ होकर ०४ सिंतबर, २०२० को अपराह्न २:२४ बजे तक रहेगी। दिनांक ०३ सितंबर, २०२० को अपराह्न काल लगभग अपराह्न १:३५ से सांय ४:०८ बजे तक रहेगा। अतः इस दिन यह तिथि अपराह्न के पूर्ण काल को व्याप्त कर रही है।
विशेष: इस बार ०४ सितंबर, २०२०, शुक्रवार को कोई भी तिथि अपराह्न व्यापिनी नहीं है। अतः इस दिन कोई भी तिथि श्राद्ध घटित नहीं होगा।
४. तृतीया का श्राद्ध : तृतीया का श्राद्ध दिनांक ०५ सितंबर, २०२० (शनिवार) को शास्त्र सम्मत मान्य होगा क्योंकि अपराह्न व्यापिनी आश्विन कृष्ण तृतीया के दिन यह श्राध्द किया जाता है। तृतीया तिथि ०४ सितंबर, २०२० (शुक्रवार) को केवल कुछ ही समय के लिए अपराह्न में विधमान है (अपराह्न २:२४ बजे के बाद), परंतु दिनांक ०५ सिंतबर को तृतीया तिथि अपराह्न काल के पूर्ण भाग को व्याप्त कर रही है।
५. चतुर्थी का महालय श्राद्ध: ०६ सितंबर, २०२० (रविवार)
६. पंचमी का श्राद्ध: ०७ सितंबर, २०२०, (सोमवार)
७. षष्ठी का श्राद्ध: ०८ सितंबर, २०२० (मंगलवार)
८. सप्तमी का श्राद्ध:- ०९ सितंबर, २०२० (बुधवार)
९. अष्टमी का श्राद्ध: १० सितंबर, २०२० (गुरुवार)
१०. नवमी के श्राद्ध (मातृ-नवमी): ११ सितंबर, २०२० (शुक्रवार)
११. दशमी का श्राद्ध: १२ सितंबर, २०२० (शनिवार)
१२. एकादशी का श्राद्ध: १३ सितंबर, २०२० (रविवार)
१३. द्वादशी का श्राद्ध: १४ सितंबर, २०२० (सोमवार)
१४. त्रियोदशी का श्राद्ध (मघा-श्राद्ध): १५ सितंबर, २०२० (मंगलवार)
आश्विन कृष्ण त्रयोदशी में पितृ श्राद्ध का विशेष महात्म्य है। यदि इस दिन अपराह्न काल के समय मघा नक्षत्र व्याप्त हो तो पितृ तर्पण, श्राद्ध, शांति के लिए विशेष महत्वपूर्ण हो जाता है। इस वर्ष १५ सितंबर, २०२० को मघा-नक्षत्र अपराह्न व्यापिनी है। अतः इस दिन श्राद्ध में पुत्रवान को अपिण्ड श्राद्ध करना चाहिए। इस दिन अपराह्न काल लगभग अपराह्न १:३७ बजे से ४:०३बजे तक रहेगा।ङ
१५/१६. चतुर्दशी/अमावस्या का श्राद्ध: १७ सितंबर, २०२० (बुधवार)