पिता की याद सताए

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस समय कई मोर्चे का एक साथ सामना कर रहे हैं। एग्जिट पोल ने एनडीए सरकार बनने के संकेत दे दिए हैं तो ऐसे में टेंशन होना ही है। ऊपर से अमेठी की पारंपरिक सीट पर हार का खतरा मंडरा रहा है। अब वायनाड का ही सहारा बचा हुआ है। वहां से जीत भी गए तो पीएम बनने के आसार दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं। राहुल ने जिस आक्रामक शैली में अपने चुनाव अभियान को लीड किया था, उसे देखकर माना जा रहा था कि आखिरी चरण के मतदान के बाद राहुल अपना पूरा फोकस विपक्षी पार्टियों को लामबंद करने में लगाएंगे और यूपीए का प्रधानमंत्री एक बार फिर इस देश को मिले, इस दिशा में रणनीति बनाकर पहल करेंगे। परंतु इससे उलट राहुल गांधी गत तीन दिनों से कुछ खास करते नजर नहीं आ रहे हैं, जबकि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्राबाबू नायडू, राहुल की तुलना में कहीं ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। इसे देख कर राजनैतिक पंडित अनुमान लगा रहे हैं कि शायद राहुल ने एग्जिट पोल देखकर ही हार मान ली है। वे मीडिया से छिपकर कहीं दुबक गए हैं। राजनैतिक पंडितों के इस आकलन को राहुल का एक ट्वीट भी बल देता है जिसमें वे ईवीएम और चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ७ वें चरण के चुनाव के दिन राहुल ने ईवीएम और मोदी सेना के साथ ही पीएम मोदी के केदारनाथ विजिट पर सवाल उठाए थे। माना जा रहा है कि राहुल तक जो इनपुट पहुंची है, उससे उनमें हताशा झलक रही है। इसी हताशा में कल अपने पिता स्व. राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर राहुल ने उन्हें याद करते हुए भावुक ट्वीट किया होगा कि आप मुझे हमेशा याद आते हैं!