पिलर्स को बचाएगी जाली, सी-लिंक की सुरक्षा

बांद्रा-वर्ली सी-लिंक पर्यटकों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है। सी-लिंक से रोजाना हजारों-लाखों की संख्या में लोग यात्रा करते हैं, ऐसे में इस सी-लिंक की सुरक्षा पर ११ साल पहले उठाया गया मुद्दा एक बार फिर ताजा हो गया है और बांद्रा-वर्ली सी-लिंक में अंडरवाटर पिलर्स पर सेफ्टी नेट लगाकर इसकी पहल की जा रही है।
बता दें कि सी-लिंक के खंभों के बीच से पुलिस के लिए निगरानी करना मुश्किल हो जाता है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बताए अनुसार ५.६ किमी के क्षेत्र में रोजाना निगरानी करने का कार्य कठिन है, ऐसे में अंडरवाटर खंभों के बीच का खाली स्थान खतरे का विषय बन सकता है। इसके लिए जाली लगाकर इस जगह को ब्लॉक कर दिया जाएगा। नाम न बताने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा के लिए बनाई गई नेट में मछुआरों के आने-जाने के लिए कुछ जगह छोड़ दी जाएगी। हालांकि पुल पर सुरक्षा के अन्य इंतजाम किए गए हैं पर अंडरवाटर खंभों के लिए कोई भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। वर्ली नाका फिशरमैन सोसायटी के चेयरमैन हरीशचंद्र नाखवा ने बताया कि वर्तमान में मछुआरे कुछ ही खंभों से जा सकते हैं, अन्य खंभों में पानी के नीचे पत्थर होने के कारण वहां से जाना संभव नहीं है। सेफ्टी नेट लगने के बाद शायद मछुुआरे का रास्ता और संकीर्ण हो जाएगा।