पीएनबी बैंक का कमाल, विदेश में बैठे युवक काे दिया लोन

पंजाब नेशनल बैंक की स्योहारा ब्रांच के मैनेजर ने ऐसे व्यक्ति को लोन दे दिया जो उस वक्त हिंदुस्थान में ही नहीं था। गौर करने वाली बात यह है कि जिस व्यक्ति को लोन दिया गया उसको पता ही नही कि उसके नाम पर बैंक ने एक लाख नव्वे हज़ार का लोन दिया गया है इतना ही नहीं लोन के पैसे उसकी अनुपस्थिति में खाते से निकाल भी लिए गये। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब वह व्यक्ति वापस हिन्दुस्तान आया और उसको बैंक की तरफ लोन रिकवरी का नोटिस मिला। लोन का नोटिस देखकर उस व्यक्ति के पैरों तले ज़मीन निकल गयी। पीड़ित ने इसकी लिखित शिकायत बैंक और स्थानीय थाने को दी लेकिन कोई कार्यावाही अमल में नहीं आयी। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक बिजनौर को भी शिकायत पत्र की रजिस्ट्री भेजी लेकिन कोई कार्यावाही नहीं हुई। थक हारकर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली और बैंक प्रबंधक सहित चार लोगों के विरूद्ध न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया।
कोर्ट को दिये गये प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि मौहल्ला पटवारियान निवासी अज़ीम पुत्र वज़ीर अहमद ने अर्जुन सिंह पुत्र भूरी सिंह निवासी मौहल्ला हिन्दू चौधरियान, नसीम पुत्र चुन्ना निवासी मौह० हयात नगर, तत्कालीन बैक प्रबन्धक दशमेश लाल और वर्तमान बैंक प्रबंधक वी पी सिंह के विरूद्ध न्यायालय बिजनौर में प्रार्थना पत्र देकर कहा है कि जब वह सउदी अरब में नौकरी करने के लिए गया था तो उसकी अनुपस्थिती में अर्जुन सिंह और नसीम ने तत्कालीन बैंक प्रबंधक दशमेश लाल से हमसाज़ होकर उसके नाम से २ जून २०१७ को १ लाख ९० हज़ार का बैंक से लोन लिया गया जबकि वह २२ मार्च २०१७ को ही सउदी अरब जा चुका था। तहरीर में कहा गया है कि जब पीड़ित अज़ीम ६ दिसम्बर २०१८ को वापस भारत आया तो बैंक की ओर से उसको एक लाख ९० हज़ार रू० के लोन रिकवरी का नोटिस दिया गया। पीड़ित ने इसकी लिखित शिकायत बैंक और स्थानीय पुलिस से की लेकिन कोई कार्यावाही नहीं हुई। पीड़ित ने इसका शिकायती पत्र पुलिस अधीक्षक को भी रजिस्ट्री किया था लेकिन कार्यावाही नहीं हुई। पीड़ित ने अब दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए न्यायालय की शरण ली है। बैंक की शाखा के वर्तमान प्रबंधक वीपी सिंह ने मामले से यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि यह उनके सामने का मामला नहींह हैं। तत्कालीन प्रबंधक दशमेश लाल से फोन पर सर्म्पक करने की कोशिश की गई तो उन्होंने काल रिसीव नहीं की। व्यक्ति की अनुपस्थिति में बैंक द्वारा व्यक्ति को लोन देने की घटना ने बैंक की विश्वसनीयता पर सवाल खडे़ कर दिये हैं।