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पुखराज धारण करने से व्यापार में मिलेगी सफलता

गुरु जी, मेरी राशि क्या है और कुंडली में दोष क्या है, कोई उपाय बताएं?
-राहुल सिंह
(जन्म २६ अप्रैल, १९८६ समय रात्रि ८.१८ बजे, मुलुंड- मुंबई)
राहुल जी, आपका जन्म तुला लग्न एवं वृश्चिक राशि में हुआ है। चंद्र द्वितीय भाव में शनि के साथ बैठकर आपके मन को व्यग्र बनाया है और मन में तमाम प्रकार की नकारात्मक बातें भी आती हैं। इस समय केतु की महादशा चल रही है आपकी कुंडली में केतु लग्न में बैठ करके लग्न को भी दूषित कर दिया है। ग्रहण योग एवं कालसर्प योग भी बना दिया है कालसर्प योग एवं ग्रहण योग की पूजा वैदिक विधि से कराएं, इससे जीवन को विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

गुरु जी, मैं व्यापार करता हूं। सफलता के लिए कोई उपाय बताएं? -रमेश कुशवाहा
(जन्म ३० अक्टूबर, १९७५ समय १० बजे, जौनपुर- यूपी)
रमेश जी, आपका जन्म वृश्चिक लग्न एवं मकर राशि में हुआ है। लग्नेश एवं रोगेश होकर मंगल अष्टम भाव में बैठकर लग्न को कमजोर कर दिया है। पराक्रमेश एवं सुखेश शनि भाग्य भाव में बैठ करके आप को भाग्यशाली तो बना दिया है लेकिन इस समय आपकी राशि पर शनि की साढ़े साती अंंितम चरण की चल रही है। शनि द्वारा शुभ फल प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ एवं पीपल की परिक्रमा करना आपको आवश्यक है। प्रतिदिन कुत्ते को बिस्किट जरूर खिलाएं एवं पुखराज धारण करने से व्यापार में सफलता मिलने लगेगी।

गुरु जी, मेरी शिक्षा किस प्रकार की होगी? कोई उपाय बताएं? -बालमुकुंद गुप्त
(जन्म ११ अक्टूबर, १९९९ समय ७.२५ बजे, प्रयागराज- यूपी)
बालमुकुंद जी, आपका जन्म तुला राशि में हुआ है। शिक्षा की जानकारी पंचम भाव से और उच्च शिक्षा की जानकारी दशम भाव से देखी जाती है। सुख एवं पंचमेश हो करके शनि नीच राशि का हो करके सप्तम भाव में बैठकर शिक्षा भाव को कमजोर बना दिया लेकिन त्रिकोण का स्वामी यदि केंद्र में बैठता है तो परिश्रम के बाद पूर्ण सफलता जरूर प्राप्त होती है। शनि वक्री होने के कारण सुख भाव में बैठा केतु तथा कर्म भाव में बैठा राहु कालसर्प योग भी बना रहा है। अत: धर्म का संग्रह करें। योगों की पूजा से शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

गुरु जी, काम बनने में अनेक प्रकार की अड़चन आती है, अगर कुंडली में दोष है तो कोई उपाय बताएं?
-राहुल दुबे
(जन्म ९ मार्च, १९७३, समय ७.०० हजे, अंधेरी-पश्चिम- मुंबई)
राहुल जी, आपका जन्म मीन लग्न एवं मेष राशि में हुआ है। भरणी नक्षत्र में ही केतु का जन्म माना जाता है किंतु आपकी कुंडली में सुखेश एवं सप्तमेश हो करके सुख भाव में ही बैठा है तथा द्वितीय एवं भाग्य मंगल आपकी कुंडली में बैठ करके आपको भाग्यशाली तो बना दिया है। दशम भाव से कर्म भाव का विचार किया जाता है। लेकिन राहु एवं मंगल की एकीकरण से अंगारक योग बन रहा है इस समय राहु की महादशा में बुध का अंतर चल रहा है। जीवन के हर प्रकार के विकास के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए अंगारक योग की पूजा आवश्यक है।

क्या मेरी कुंडली में कोई दोष है? -शिव कुमार
(जन्म ३ फरवरी, १९९०, समय, ९.३६ बजे, प्रयागराज- यूपी)
शिव कुमार जी, आपका जन्म मीन लग्न एवं मेष राशि में हुआ है। आपकी कुंडली का सूक्ष्मता से अवलोकन किया गया तो द्वितीयेश एवं भाग्येश मंगल दशम भाव में बैठ करके आपको भाग्यशाली बनाया है लेकिन आपकी कुंडली में पंचम भाव पर केतु एवं लाभ भाव पर सूर्य के साथ में राहु बैठकर ग्रहण योग बना दिया है तथा सूक्ष्मता से अवलोकन करने पर कालसर्प योग भी बन रहा है। इन योगों के कारण आप अपने परिश्रम का पूर्ण पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। जीवन को हर प्रकार से विकसित करने के लिए ग्रहण योग की पूजा आवश्यक है।