पुराने पन्नों से… उधार!, मदद के बदले मिली मौत

तीन ओर से समुद्र से घिरी मुंबई दुनिया के सर्वाधिक आबादीवाले शहरों में एक मानी जाती है। यहां समुद्र की लहरें स्थानीय लोगों सहित देश और दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इन्हीं लहरों के साथ कई बार लाशें भी बहकर बाहर आ जाती हैं। ये लाशें ऐसे लोगों की होती हैं, जो लहरों के साथ खेलने के चक्कर में बह जाते हैं या फिर खुदकुशी के इरादे से खुद को लहरों के हवाले कर देते हैं लेकिन लहरों के साथ बहकर आई लाशें कई बार ऐसी भी होती हैं, जो हत्या के बाद गुनाह छिपाने के लिए समुद्र में फेंकी गई होती हैं।
१४ साल पहले ऐसी ही एक लाश पॉश मानी जानेवाले मलबार हिल इलाके में समुद्र में लहरों के बीच मिली थी। टुकड़ों में बंटी उक्त लाश एक चादर में बांध कर फेंकी गई थी। उक्त मृतक के हत्यारों को ढूंढ़ रही पुलिस की मेहनत १४ साल बाद सफल हुई है। महज १४ हजार रुपए के लिए मृतक के पांच दोस्तों ने उसकी हत्या कर दी थी।
वर्ष २००६ के मार्च महीने में नौसेना के अधिकारियों को दक्षिण मुंबई के मलबार हिल स्थित राजभवन के पीछे समुद्र में एक गठरी तैरती मिली थी। चादर में बांधकर समुद्र में फेंकी गई उक्त गठरी, जब नौसेना के अधिकारियों ने खोली तो उनकी चीख निकल गई। नग्न अवस्था में लाश के टुकड़े गठरी में बंधे थे। उक्त लाश की शिनाख्त मलबार हिल पुलिस के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती थी। मलबार हिल सहित आसपास क्षेत्र के गुमशुदा लोगों में पुलिस ने उक्त मृतक की पहचान ढूंढ़ने का प्रयास शुरू किया। कुछ दिनों की मेहनत के बाद पुलिस को मलबार हिल क्षेत्र में रहनेवाले रणसिंह उर्फ कर्णसिंह वाल्मीकि के कई दिनों से लापता होने की सूचना मिली। गुमशुदगी की शिकायत कर्णसिंह के साले ने दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता को जब राजभवन के पीछे गठरी (टुकड़ों) में मिली लाश दिखाई गई तो उसने लाश की पहचान कर्णसिंह के रूप में की। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि कर्णसिंह ने अपने मित्र धर्मपाल, प्रेमपाल, वीरपाल उर्फ वीरसिंह सतपाल, प्रेमपाल उर्फ बाबाजी को १५ हजार रुपए उधार दिए थे। कर्णसिंह से कर्ज लेनेवाले ये तमाम लोग उसी के गांव के निवासी थे लेकिन वे कर्णसिंह के पैसे लौटाने में आनाकानी कर रहे थे। इसी बात पर कर्णसिंह का उनसे विवाद हुआ था। इसी विवाद में सतपाल और बाबाजी ने कर्णसिंह की हत्या कर दी थी। मृतक की शिनाख्त हो जाने के बाद पुलिस ने हत्यारों की शिनाख्त शुरू की लेकिन आरोपियों का कोई सुराग पुलिस को नहीं मिला। वे मुंबई से पलायन कर चुके थे लेकिन अपने गांव भी नहीं पहुंचे थे। १४ साल तक पुलिस लगातार उक्त हत्यारों के बारे में उनके गांववालों से जानकारी हासिल करने की नाकाम कोशिश करती रही और १४ साल तक हत्या का यह मामला मलबार हिल पुलिस के रिकॉर्ड में अनसुलझा ही रहा।
हाल ही में १४ साल पुराने इस मामले में मलबार हिल पुलिस को महत्वपूर्ण टिप मिल गई। पुलिस को पता चला कि कर्णसिंह का एक हत्यारा हरियाणा के फरीदाबाद इलाके में अपनी पत्नी के साथ रहता है। उक्त टिप पर तत्परता दिखाते हुए डीसीपी राजीव जैन के मार्गदर्शन तथा वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक पाटील के नेतृत्व में पुलिस निरीक्षक वाघ, एपीआई नागेश जाधव व पीएसाई नाथ और लोखंडे की विशेष टीम बनाई गई। हत्यारों के बारे में मिली टिप की सत्यता जांचने के बाद टीम में शामिल पीएसआई लोखंडे अपने सहयोगियों के साथ फरीदाबाद के लिए रवाना हो गए। लोखंडे की टीम ने फरीदाबाद की कृष्ण कॉलोनी स्थित झुग्गी बस्ती से आरोपी सतपाल नाथू बाबू वाल्मीकि के घर आधी रात के समय धावा बोला और उसे दबोच लिया। उससे पूछताछ में कर्णसिंह के एक और हत्यारे का सुराग लोखंडे की टीम को मिल गया। उक्त आरोपी बाबाजी वाल्मीकि, नई दिल्ली स्थित मालवीय नगर के जगदंबा नगर की झुग्गी बस्ती में रहता था। लोखंडे की टीम बाबाजी को दबोचने की तैयारी कर रही थी पर उसी दरम्यान बाबाजी को भनक लग गई कि पुलिस ने सतपाल को पकड़ लिया है और पुलिस कभी भी उसे दबोचने के लिए पहुंच सकती है। इस टिप के बाद बाबाजी, पत्नी के साथ भागने की तैयारी में लग गया। हालांकि पुलिस इस बार ज्यादा तेज निकली और बाबाजी भागने में नाकाम रहा। इस तरह १४ साल पुराने हत्याकांड में हत्यारे कानून के शिकंजे में फंस गए।