पुरुषों से आगे हैं महिलाएं

मुंबई के पॉकिटमार
मुंबई में महिला जेबकतरों की अपनी जमात है। इस जमात में पुरुषों की तरह वे महिलाएं भी हैं। जो मुंबई की धड़कन कही जानेवाली लोकल ट्रेनों, बसों, भीड़-भाड़वाले इलाकों में पॉकिट मारने का काम करती हैं। मुंबई सेंट्रल की भाभी नाम से जानी जानेवाली एक महिला, जिसने इस जीवन में कोई ऐसा ‘सी’ ग्रेड का अपराध नहीं है, जो उसने और उसकी टीम ने नहीं किया है उसके कई लड़के आज भी मोबाइल मारने का काम करते हैं। आरपीएफ के एक आईपीएफ की मानें तो उसके एक गुर्गे को आरपीएफ ने एक महीने में दो बार पकड़ लिया और कोर्ट में हाजिर किया। कोर्ट में भाभी का पारा गर्म हो गया। मुंबई सेंट्रल के कोर्ट में ये भाभी उक्त जेबकतरे को गालियां देते हुए कह रही थी कि ‘अगर महीने में दो बार पकड़ा जाएगा तो कमाएंगे क्या? दोबारा पकड़ा गया तो टांग तोड़ दूंगी।’ एक अन्य मामले में जब बांद्रा रेलवे पुलिस थाने के सीनियर इंस्पेक्टर रूप सिंह तड़वी थे तब एक गर्भवती महिला चांदनी (बदला हुआ नाम) पकड़ी गई। उसने पुलिस को बताया दिया था कि वह लोकल की भीड़ में चढ़ती थी। गर्भवती होने का दर्द अपने हाव-भावों से दिखाकर लोगों की सहानभूति प्राप्त करती। जब महिलाओं का ध्यान उसकी ओर सहानुभूति पूर्ण होता तो उसकी अन्य पंटर महिलाएं और लड़कियां कई जेबें साफ कर देती थीं। पश्चिम रेलवे में भाभी और चांदनी जैसी एक नहीं दर्जनों हैं, जो जेब काटने का काम करती हैं। वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे की मुमताज का इंतकाल हो गया लेकिन उसका शिकार बने लोग आज भी उसे नहीं भूले हैं। मुमताज का आतंक लोखंडवाला, ओशिवरा के कई इलाकों में था। ये लोग अय्याश और रतजगा ग्राहक को रोककर पहले लिफ्ट मांगती और बाद में बलात्कार का अपराध दर्ज करवा उनका बटुआ साफ कर देतीं। सीएसटीएम स्टेशन पर बिहार से भागकर आई रोशनी नामक युवती की भी अजब दास्तान है। उसका नाम था भाग्यश्री। भागकर जब वह सांताक्रुज स्टेशन आई तो उसकी मुलाकात बदरू नामक एक जेबकतरे से हुई। उसने उसके पेट की आग बुझाई और उसे ट्रेनिंग दी। बाद में बदरू उससे गिरगांव चौपाटी पर जेबें कटवाने लगा। चर्नी रोड स्टेशन पर रहनेवाले अकबर से जब रोशनी की मुलाकात हुई तो उसने बदरू को छोड़ दिया और अकबर की रखैल बन गई। अकबर सूटकेश `साफ’ करने का काम करता था और उसने रोशनी को बड़ी चोरनी बना दिया। कई पुलिस थानों के आपराधिक इतिहास में चोरनी रोशनी की `रोशनी’ आज भी पड़ती रहती है।
(क्रमश:)