पुलिस की पहुंच से दूर ७० फीसदी साइबर अपराधी

साइबर अपराध वर्तमान समय में दुनिया भर की पुलिस के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं। बात दुनिया की सर्वश्रेष्ठ स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस के समकक्ष मानी जानेवाली मुंबई पुलिस की करें तो साइबर अपराधियों के सामने मुंबई पुलिस फिसड्डी साबित हो रही है। पिछले ६ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो ७० फीसदी आरोपियों तक पुलिस पहुंच ही नहीं पाई है।
बता दें कि आजकल सरकार आर्थिक लेनदेन को डिजिटल बनाने पर जोर दे रही है। हालांकि इन तकनीकों का आम लोगों को उतना लाभ नहीं मिला है, जितना ज्यादा अपराधी लाभ उठा रहे हैं। नतीजतन पुलिस थानों में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि पुलिस अपराधियों तक पहुंच ही नहीं पा रही है। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख को मिली जानकारी के अनुसार पिछले ६ वर्षों में बीकेसी स्थित साइबर पुलिस थाने में साइबर अपराध के कुल ६२७ मामले दर्ज हुए हैं। सरकारी सूचना अधिकारी और सहायक पुलिस आयुक्त (जनसंपर्क) सूर्यकांत तरडे ने आरटीआई के जवाब में बताया कि २०१३ से २०१८ तक कुल ६२७ साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए हैं, इनमें से केवल १६९ आपराधिक मामलों को ही हल किया जा सका है। इन अपराधों में डेबिट कार्ड से संबंधित धोखाधड़ी, जॉब प्रâॉड, सोशल मीडिया, हैकिंग आदि साइबर अपराध शामिल हैं। आरटीआई के तहत बताया गया है कि वर्ष २०१३ में साइबर अपराध के ४१ मामले सामने आए, जिनमें से सिर्फ १४ मामले ही हल हुए हैं। इसी तरह वर्ष २०१४ में साइबर अपराध के ६६ मामले सामने आए, जिनमें से १५ मामले ही हल हो सके। वर्ष २०१५ में साइबर अपराध के मामले ३०० तक बढ़ गए लेकिन पुलिस सिर्फ ६६ मामलों की गुत्थी ही सुलझाने में सफल हुई। इसी तरह वर्ष २०१६ में साइबर अपराध के १६३ मामलों में सिर्फ ४७ जबकि वर्ष २०१७ में ३० से १५ और वर्ष २०१८ में २७ मामलों में केवल ६ मामलों की गुत्थी ही पुलिस सुलझा पाई है।