पूर्व विद्यार्थियों का आईआईटी उपहार

मुंबई में कचरे की समस्या एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। कचरे के निपटारे के लिए मनपा को हर वर्ष करोड़ों रुपए भी खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्रों ने एक अनोखी पहल की है, जिससे कैंटीन से निकलनेवाले कचरे (खाद्य पदार्थों के अवशेष और शेष बचे खाने) से बायोगैस निर्मित की जाएगी, जिसे र्इंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। आईआईटी के लिए यह प्लांट किसी उपहार से कम नहीं। कचरे के निपटारे के साथ-साथ प्लांट की मदद से रोजाना २५ प्रतिशत तक एलपीजी गैस की बचत भी होगी।

बता दें कि आईआईटी मुंबई के तीन कैंटीन और होस्टल से रोजाना २ टन कचरा निकलता है। ऐसे में १९९० बैच के कुछ विद्यार्थियों ने वैंâपस में ही कचरे का निपटारा करने और उससे ऊर्जा तैयार करने की योजना बनाई। अपने दिमाग और मेहनत से पूर्व-विद्यार्थियों ने आईआईटी वैंâपस में ही बायोमेथेनेशन प्लांट बनाया है। इस प्लांट की रोजाना की क्षमता २ टन कचरे से ऊर्जा निर्मित करने की है। ऐसे में होस्टल में इस्तेमाल होनेवाले एलपीजी सिलिंडर की कुल खपत में २५ प्रतिशत की बचत होगी। इस प्लांट में फलों व सब्जियों के अवशेष, किचन से निकलेवाले कचरे और बचे हुए खाद्य पदार्थों का निस्तारण करने व ऊर्जा निर्माण करने की क्षमता है। कल इस बायोमेथेनेशन प्लांट का उद्घाटन आईआईटी मुंबई के निदेशक प्रो. देवांग खाखार के हाथों हुआ। इस अवसर पर डीन (आईपीएस) प्रो. बीवीएस विस्वाना, डीन (एसीआर) प्रो. सुहास जोशी, १९९० बैच की पूर्व-विद्यार्थी एन. अनु, रवि शंकर और आईआईटी मुंबई के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीएस पाटील व अन्य कर्मचारी मौजूद थे। पूर्व विद्यार्थियों की इस पहल को लेकर आईआईटी प्रशासन ने आभार प्रकट किया है।