पेट को परेशान कर रहा है रोड का खाना, ४५ दिन में १,२०० मरीज

सामना संवाददाता / मुंबई
आधे से ज्यादा बीमारियों की जड़ पेट ही है। डॉक्टर हमेशा कहते हैं कि पेट का ध्यान रखें। शुद्ध भोजन व जल ग्रहण करें लेकिन मुंबईकर हैं कि मानते नहीं। रोड पर खुले में बिकनेवाले खाद्य व पेय पदार्थों पर धूल, मिट्टी, गंदगी में रहनेवाली मक्खियां बैठती हैं। अब रोड पर उपलब्ध दूषित खाना खाओगे तो पेट तो परेशान ही होगा न। मुंबई में विगत ४५ दिनों में १,२०० गैस्ट्रो (पेट से संबंधित बीमारी) के मरीज पाए गए हैं।
सड़क किनारे बिकनेवाले वड़ा-पाव, समोसे, चाइनीज भेल, पानी-पूरी व जूस लोगों को काफी भाता है। लोग बड़े चाव से उक्त चीजों का सेवन करते हैं लेकिन इस बात पर गौर नहीं करते कि उसे कितनी सफाई से बनाया जा रहा है और किस तेल का इस्तेमाल किया जा रहा है? या फिर खाद्य पदार्थों को ढंककर रखा जा रहा है या नहीं। ज्यादातर सड़क पर बिकनेवाले खाद्य व पेय पदार्थ खुले में बेचे जाते हैं। गाड़ियों से निकलनेवाले प्रदूषण, सड़क की धूल, कचरों में बैठनेवाली मक्खियां खाने को लगभग जहर बना देती हैं। दूषित खाने का सेवन यानी बीमारी को न्यौता देना है। मनपा से मिले आंकड़ों के अनुसार जून महीने में ही ७७७ लोगों को गैस्ट्रो की दिक्कत के चलते अस्पताल में एडमिट होना पड़ा जबकि १ से १४ जुलाई तक कुल १३८ लोगों को पेट में दर्द की शिकायत के बाद एडमिट होना पड़ा। मनपा की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मजा केसकर ने कहा कि हम हमेशा लोगों को बाहर के खाने से परहेज करने को कहते हैं। साफ-सफाई न होने के कारण सड़क का खाना या जूस का सेवन पेट की बीमारियों को बढ़ावा देता है। संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. ओम श्रीवास्तव ने कहा कि दूषित खान-पान से हेपेटाइटिस बीमारी होने का खतरा भी रहता है। यह आपके लीवर को काफी क्षति पहुंचाता है। पेट में दर्द, उल्टी, बुखार, दस्त होना आदि गैस्ट्रो के लक्षण हैं।