पेड़ गिरेगा तो ठेकेदार नपेगा, मनपा कसेगी नकेल

पेड़ों के गिरने से होनवाली मौतों के लिए अब मनपा ने ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराने का निर्णय लिया है। पेड़ों की छंटाई के ठेके के नियमों में मनपा ने संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत अब भविष्य में पेड़ गिरा तो ठेकेदार नरेंगे।
बता दें कि हर वर्ष मॉनसून से पहले पेड़ों की छंटाई की जाती है। वर्तमान में मुंबई में १.२३ लाख पेड़ हैं। मॉनसून में अक्सर पेड़ गिरने की घटनाएं अधिक घटती है। बीते वर्ष मॉनसून में पेड़ गिरने की ४७० घटनाएं घटीं। इन हादसों में सात लोगों की मौत हो गई और २० से अधिक लोग जख्मी हो गए जबकि पिछले छह वर्षों में शहर और उपनगरों में २१,५०० पेड़ गिरने की घटनाएं घटीं। इन हादसों में करीब ३० लोगों की जान जा चुकी है। इन हादसों को लेकर मनपा प्रशासन की काफी किरकिरी हो रही थी। वृक्ष प्राधिकरण की बैठक से लेकर मनपा सदन तक पेड़ गिरने के हादसों को लेकर प्रशासन नगरसेवकों के गुस्से का शिकार होता रहा है। कई बार प्रशासन पर एक ही ठेकेदार को पेड़ छंटाई का ठेका दिए जाने का आरोप भी लग चुका है। इन हादसों के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग भी प्रशासन से कई बार हो चुकी है। इसे देखते हुए अब मनपा प्रशासन ने ठेके के नियमों में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत दो से अधिक बार गलती करने पर ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। इतना ही नहीं पेड़ गिरने के हादसे में होनेवाली मौत के लिए भी ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
शहर और उपनगर में सवा लाख पेड़
छह साल में पेड़ गिरने से हुई ३० मौत
तीन महीने में ४७० पेड़ गिरे