पॉल्युशन से भेजा हो रेला है खाली!, मेमोरी लॉस, अस्थमा और निमोनिया का हमला

भागदौड़ भरी तेज-तर्रार जिंदगी में आज कोई भी मुंबईकर प्रदूषण से अछूता नहीं है। ऐसे में प्रदूषण का सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। रोजाना प्रदूषण के संपर्क में आनेवाले लोगों का दिमाग सही ढंग से काम करना बंद कर देता है। ऐसे में मुंबईकरों का तो यही कहना है कि प्रदूषण से भेजा खाली हो रेला है। ना सिर्फ भेजे यानी दिमाग को बल्कि प्रदूषण शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करता है। प्रदूषण मुख्य रूप से शिशुओं में अस्थमा, वृद्धों में निमोनिया अन्य लोगों में फेफड़ों से संबंधित बीमारियां और अन्य कई रोगों की जड़ है।
बता दें कि मुंबई में दिन-ब-दिन प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जा रही है। ऐसे में इससे होनेवाली बीमारियों से लोगों का हाल-बेहाल है। चायना के इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिसर्च में स्कूली बच्चों पर किए गए प्रयोग में यह पाया गया है कि प्रदूषण के कारण बच्चों में गणितीय गणना करने और सीखने की क्षमता कम हो जाती है। चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन के डायरेक्टर डॉक्टर संदीप सालवी ने बताया कि आज प्रदूषण ने लगभग प्रत्येक मुंबईकर को जकड़ रखा है, जिसका साधी प्रभाव लोगों के स्वाथ्य पर पड़ता है। इसके कारण लोगों के दिमाग पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उनमें मेमोरी लॉस, बेचैनी और चिड़चिड़ापन पैदा होता है। प्रदूषण के कारण महाराष्ट्र के लोगों की जीवन आयु भी लगभग दो साल घट जाती है। इससे वृद्धों में हृदय संबंधित बीमारियां, निमोनिया व ५ साल से कम उम्र के बच्चों में अस्थमा हो जाता है। युवाओं पर भी इसका प्रकोप भारी है।