प्रदूषण ने बनाया दूध को जहर, दूध में मिल रहा है पारा और सीसा

दूध पीना सेहत के लिए लाभदायक है। पर सावधान! यह खतरनाक हो सकता है, ऐसा इसलिए क्योंकि मुंबई शहर और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण ने भैंस के दूध को लगभग जहर में तब्दील कर दिया हैं। परेल स्थित बॉम्बे वेटरनरी कॉलेज के शोधकर्ताओं द्वारा मुंबई, ठाणे, भिवंडी के तबेलों में जाकर भैसों के दूध और पानी के नमूनों की जांच की गई। जिसमें ये जहर वाली बात सामने आई।
मुंबई में बिकनेवाले तबेले के दूध जानलेवा हैं। इनमें खतरनाक तत्व पाए गए हैं। परेल स्थित बॉम्बे वेटरनरी कॉलेज के शोधकर्ताओं ने मुंबई के कई तबेलों के दूध की जांच की है। जांच में यह पाया गया कि उक्त ताजा दूध में मनुष्य के लिए जानलेवा साबित होनेवाले सीसा (लीड) और पारा (मरक्यूरी) की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संघठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित मानक से अधिक पाया गया है। खासकर बोरीवली और भिवंडी के तबेलों से लिए गए दूध के नमूनों में धातुओं का प्रमाण अधिक पाया गया। डॉक्टरों की मानें तो यह आगे चलकर लोगों के अंगों को निष्क्रिय कर देंगे।
बता दें कि दूध पीने से शरीर को वैâल्शियम प्राप्त होता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं लेकिन वही दूध अब आपके शरीर के अन्य अंगों को खराब कर सकता है। बॉम्बे वेटनरी कॉलेज के फार्मोकोलॉजी एंड टॉक्सिकोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने तबेले के ताजा दूध में मौजूद धातुओं के प्रमाण को जांचने की ठानी। इस कड़ी में शोधकर्ताओं ने गोरेगांव, बोरीवली, ठाणे, भिवंडी और कल्याण स्थित तबेलों से ताजा दूध के लगभग १०० नमूने लिए और पशुओं को पीने के लिए दिए जानेवाले पानी के भी नमूने लिए गए। डब्ल्यूएचओ की मानक की बात करें तो दूध में लीड और मरक्यूरी की मात्रा ०.०१ पीपीएम होना चाहिए लेकिन बोरीवली के तबेले से लिए गए नमूने सबसे अधिक ०.०८ पीपीएम की मात्रा में लीड पाया गया और भिवंडी में ०.०३२ पीपीएम मरक्यूरी की मात्रा पाई गई। शोधकर्ताओं ने कयास लगाया है कि आसपास के क्षेत्र में बढ़ रही पैâक्ट्रियां कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार हैं। इनमें से निकलनेवाली धातु प्राणियों के खान-पान को दूषित कर रही हैं। दूषित हवा और खाने के कारण उक्त धातु प्राणियों के शरीर में प्रवेश कर रही हैं और उनके दूध में समाविष्ट होकर निकल रही हैं। मनपा मेजर अस्पतालों के पूर्व निदेशक व हिंदुजा अस्पताल के निदेशक (पेट रोग विशेषज्ञ) डॉ. अविनाश सूपे ने ‘दोपहर का सामना’ को बताया, ‘आज के दौर में खेतों में बनावटी खाद और कीटनाशक का उपयोग अधिक हो रहा है। उक्त चीजों में मौजूद लीड और मरक्यूरी जैसे घातक धातु खाद्य सामग्री में मिल रहे हैं और वही चारे के रूप में पशुओं को दिया जा रहा हैं। मनुष्य द्वारा उक्त धातुओं से दूषित खाद्य या पेय पदार्थ पीने के चलते किडनी, लीवर फेल हो रहे हैं। यदि समय पर कुछ कदम न उठाए गए तो आगे चलकर बड़ी तकलीफ हो सकती है। परेल स्थित जानवरों के अस्पताल के संचालक डॉ. जे सी खन्ना ने कहा, ‘लीड और मरक्यूरी स्लो पाइजन की तरह हैं। इनका निरंतर सेवन यानी मौत को आमंत्रित करने जैसा हो फिर चाहे वह मनुष्य हो या प्राणी, यह दोनों के लिए घातक है।