प्रदूषण लील रहा है उम्र

आपको जानकर यह हैरानी होगी कि तंबाकू उपभोग से अधिक असामयिक मौतों का जिम्मेदार प्रदूषण को माना गया है। देश के शोधकर्ताओं द्वारा किए एक अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र में प्रदूषण के कारण होनेवाली बीमारियों से वर्ष २०१७ में १ लाख ८ हजार ३७ लोगों की मौत हुई थी। यानी हर दिन प्रदूषण से होनेवाली बीमारियों के चलते रोजाना ३०० लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। प्रदूषण के चलते राज्य में रहनेवाले लोगों की उम्र डेढ़ साल कम हो रही है जबकि हिंदुस्थान में १.७ वर्ष लोग कम जी रहे हैं।
बता दें कि ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज नामक वैश्विक पहल के अंतर्गत इंडियन मेडिकल रिसर्च आईसीएमआर पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैलुएशन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से एक अध्ययन किया गया। इस अध्ययन में देश के विभिन्न राज्यों में वायु प्रदूषण के कारण होनेवाली मौतों, बीमारियों के बढ़ते बोझ और कम होती जीवन प्रत्याशा का आकलन किया गया है। २०१७ में देश की ७७ प्रतिशत जनसंख्या पर दूषित हवा का साया रहा। नेशनल एंबिनेंट एयर क्वॉलिटी स्डैंडर्ड के अनुसार पीएम २.५ के लिए ४० माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर सेफ लिमिट निर्धारित की गई है जबकि पिछले साल हिंदुस्थान में यह ९० माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रही, जो दुनिया में अब तक का सबसे अधिक स्तर है। अध्ययन के अनुसार दुनिया की १८ प्रतिशत आबादी हिंदुस्थान में रहती है लेकिन वायु प्रदूषण के कारण विश्वभर में होनेवाली मौतों में से २६ प्रतिशत लोग हिंदुस्थान के थे। लीलावती अस्पताल के कंसल्टेंट चेस्ट फिजिशियन डॉ. प्रहलाद प्रभु देसाई ने कहा कि प्रदूषण न केवल फेफड़ों को बल्कि पूरी शरीर को क्षति पहुंचा रहा है। वायु प्रदूषण के कारण श्वसन संक्रमण, फेफड़ों में अवरोध, हार्टअटैक, स्ट्रोक, फेफड़ों का वैंâसर हो रहा है। डॉक्टर अपने स्तर पर इलाज और लोगों को जागरूक कर सकते है लेकिन हवा के बिगड़ते स्तर को ठीक करने के लिए सरकार को नीति बनानी चाहिए और सभी को इसका सहयोग करना चहिए।