" /> प्रवासी व हिंदुस्थानी विशेषज्ञों की राय,विकास के लिए सतत अनुसंधान-प्रयोग जरूरी

प्रवासी व हिंदुस्थानी विशेषज्ञों की राय,विकास के लिए सतत अनुसंधान-प्रयोग जरूरी

• केएनआई में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार विज्ञानियों व विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने दिया प्रयोगों पर जोर
• अमेरिका, जर्मनी, जापान व फिजी के विज्ञानियों ने किया सत्र को संबोधित

‘विकास का सतत प्रवाह बरकरार रहे, इसके लिये जरूरी है कि निरंतर प्रयोग, अनुसंधान व नवाचार का सिलसिला चलता रहे…।’ ये लब्बोलुआब है यूपी के सुल्तानपुर स्थित कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का। जिसमें प्रवासी-हिंदुस्थानी भौतिक-जैविक व सामाजिक विषयों के विशेषज्ञों ने सतत विकास के लिए आवश्यक तत्वों पर विस्तार से चर्चा की। उद्घाटन सत्र में मैसाचुसेट्स, यूएसए के प्रो. बलराम सिंह ने जेनेटिक्स के क्षेत्र में नव प्रयोग व प्रविधियों को जरूरी बताया।

सीएसआईआर,लखनऊ के प्रो. किशोर के श्रीवास्तव ने औषधि विकास प्रक्रिया के शोध अनुसंधान की सतत आवश्यकता पर बल दिया। नीति आयोग के सदस्य प्रो.आरबी सिंह ने सतत विकास पर यूएनओ की अवधारणा पर विचार व्यक्त किए। सत्र की अध्यक्षता डॉ.राममनोहर लोहिया अवध विवि के कुलपति प्रो.मनोज दीक्षित ने की। पैनल डिस्कशन में प्रो.आरसी दूबे विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी, गुरुकुल कांगड़ी विवि हरिद्वार ने कोविड- १९ के परिप्रेक्ष्य में भारतीय मिथ को प्रासंगिक बताया। मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट आफ इंटेलीजेंस सिस्टम, स्टटगार्ट, जर्मनी के प्रो.अजय विक्रम सिंह ने नैनो रोबोटिक्स को सदैव प्रासंगिक बताया। प्रो.एआर सिद्दीकी प्रयाग विवि, प्रयाग ने सतत विकास के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर चर्चा की।प्रो सुनील कटेरिया जेएनयू नयी दिल्ली ने फोटो बायोलॉजी पर, डॉ मधुकर मिश्रा,बिट्स पिलानी,राजस्थान ने तापमान और धातुओं के बदलते व्यवहार पर, तरुण कृष्ण ,डब्लिन वि.वि.आयरलैण्ड ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर एवं प्राची श्रीवास्तव ,एमिटी विवि लखनऊ ने जैव सूचनातंत्र पर अपने विचारों को साझा किया। डीके त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन व सत्र संचालन डा.आरके पांडेय ने किया।

वेबिनार के दूसरे दिन डा.महेन्द्र सिंह, मियामी विवि यूएसए ने गालब्लेडर के कैंसर ड्रग पर,डा नेत्रानंद साहू,क्योटो विवि,जापान ने जलवायु परिवर्तन का फसलों पर प्रभाव विषय पर,डा. एसजी वी सुब्रमण्यम, अन्ना विवि चेन्नई ने रिमोट सेंसिंग पर विचार व्यक्त किया।इसके अतिरिक्त डाँ.शोबी वेलेरी,प्रो.रामकृपाल, डाँ. राजिंदर सिंह चंदेल,पटियाला, पंजाबी वि.वि.ने भी अपने शोध को साझा किया।सत्र का संचालन डा एल.के.द्विवेदी ने व धन्यवाद डा एके सिंह ने दिया।सत्र में उप प्राचार्य डा. एस.के.सिंह, डा. वीपी सिंह ने भी संस्थान की ओर से धन्यवाद दिया। समापन सत्र में अरविंद छाबड़ा,एमिटी हरियाणा, एम.गुलाम महबूब, ढाका,बांग्लादेश, डा. राजीव सिंह, एन.बी.एफ.जी.आर. लखनऊ, डा. राकेश बंदीछोर रेड्डी लेब्रोटरी, हैदराबाद व अरविन्द श्रीवास्तव, रिजर्व बैंक आफ इंडिया, मुम्बई ने अपने शोध साझा किया। प्राचार्य डा. राधेश्याम सिंह ने आभार जताया। इस विस्तृत विचार समारोह से ३०० शोध छात्र जुड़े।१२५ शोधपत्र आए। ६० शोधपत्र का वाचन सुनिश्चित किया गया।संगोष्ठी मे यूएसए,इंग्लैंड, आयरलैण्ड, जर्मनी, जापान, फीजी,बांग्लादेशके विचारकों ने प्रतिभाग करके वेबिनार को गरिमायुक्त बनाया।