प्राण जाए पर प्रण न जाए!, उद्धव ठाकरे ने दिलाई हिंदुत्व संकल्प की शपथ

शिवसेना की ५३वीं वर्षगांठ पर दुग्धशर्करा का योग रहा। षण्मुखानंद सभागृह में आयोजित इस वर्षगांठ समारोह में शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे के निमंत्रण पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस विशेष रूप से उपस्थित रहे। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस अवसर पर शिवसैनिकों का मार्गदर्शन करते हुए शिवसेना-भाजपा की युति अभेद्य होने की बात पर जोर दिया। शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों का मार्गदर्शन करते हुए कल उन्हें हिंदुत्व संकल्प की शपथ भी दिलाई। उन्होंने कहा कि आज हम सब जो एक साथ आए हैं तो हमें शपथ लेनी चाहिए कि टूटेंगे नहीं, फूटेंगे नहीं, भले ही प्राण चला जाए लेकिन हिंदुत्व का प्रण नहीं छोड़ेंगे। कल कार्यक्रम के दौरान उद्धव ठाकरे ने अयोध्या दौरे पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि मैंने वहां विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने हैं और जल्द से जल्द राम मंदिर का निर्माण होगा। राम मंदिर बनेगा और बनकर रहेगा। उद्धव ठाकरे के ऐसा कहते ही पूरा सभागृह ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि अयोध्या में कुछ लोगों ने राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे पर ‘लेकिन’ का सवाल खड़ा किया है। तब मैंने उन्हें कहा कि हमारे मराठी में एक कहावत है ‘शुभ-शुभ बोलो!’ अभी तो सरकार बनी है और ये शुरुआत है।
हमारे बीच मतभेद जनहित के मुद्दों पर था। युति करने से पहले इन सभी मुद्दों को सुलझाने का काम किया गया। जिन जनहित मुद्दों को लेकर विवाद और संघर्ष था, वह अब समाप्त हो गया है तो फिर मतभेद किस बात का? मतभेद करेंगे तो नुकसान किसका? आपके हृदय में भी भगवा, हमारे हृदय में भी भगवा है। ऐसा कहते हुए शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कल एक बार फिर युति मजबूत होने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जब हम लड़ रहे थे तब भी हम मीडिया की हेडलाइन थे और आज अब एक साथ आए हैं तब भी मीडिया की हेडलाइन हैं।
कल शिवसेना की ५३वीं वर्षगांठ सायन स्थित षण्मुखानंद सभागृह में संपन्न हुई। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि हम दोनों के मन जुड़े हैं। अब युति हो गई है। यह मंच बहुत बड़ा है। यह मंच षण्मुखानंद सभागृह तक सीमित नहीं है। यह मंच पूरे महाराष्ट्र का है, जिसे सभी देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिवसेना की वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को आमंत्रित किए जाने पर कुछ लोगों के पेट में दर्द हो रहा है। शिवसेना की वर्षगांठ पर गोपीनाथ मुंडे, प्रमोद महाजन जैसे भाजपा नेता आ चुके हैं। इतना ही नहीं, भाजपा के अधिवेशन पर शिवसेनाप्रमुख को आमंत्रित भी किया जा चुका है और तो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिवतीर्थ पर आ चुके हैं। यह प्रथा पुरानी है। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने राहुल गांधी, ओवैसी और बुआ-बबुआ पर भी जमकर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सावरकर को डरपोक कहनेवालों की हार पर मुझे खुशी है। धारा-३७० को बनाए रखने और देशद्रोहियों की पैरवी करनेवालों की इस चुनाव में हार हुई है। इसका मुझे आनंद है। ओवैसी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि ओवैसी कहते हैं कि हम भी इस देश के भागीदार हैं। अगर भागीदार हो तो ‘वंदे मातरम’ बोलने में शर्म क्यों आती है? इस देश में इतनी आजादी देने के बाद भी तुम्हारे मन में तरह-तरह के कीड़े पनप रहे हैं। उन्होंने ओवैसी के उन भाषणों की भी खबर ली जिसमें उसने कहा कि ईवीएम में फेर-फार नहीं है बल्कि हिंदुओं के दिमाग में फेर-फार हुआ है। ओवैसी ऐसा बोलता रहे तो हम हिंदू क्या चुप बैठें? शिवसेना-भाजपा युति पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि हमारा सब कुछ तय हो चुका है, किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि किसानों की मदद के लिए सरकार ने राशि आवंटित की है लेकिन उन तक यह मदद पहुंच नहीं पा रही है। मदद बीच में रोकनेवाले शुक्राचार्य कौन हैं? ऐसा सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की योजना भाजपा शासन के साथ मिलकर शिवसैनिक किसानों तक पहुंचाए बिना चुप नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि जब भाजपा-शिवसेना के बीच संघर्ष चल रहा था उस समय विपक्षी नहीं लड़ रहे थे और आज हम साथ-साथ हैं तो विपक्ष है ही नहीं। इस मौके पर मंच पर शिवसेना नेता व युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे, शिवसेना नेता व सांसद संजय राऊत, शिवसेना नेता मनोहर जोशी, सुभाष देसाई, दिवाकर रावते व चंद्रकांत खैरे, शिवसेना सचिव व सांसद अनिल देसाई, मिलिंद नार्वेकर सहित तमाम शिवसेना पदाधिकारी आदि उपस्थित थे।

 सावरकर को डरपोक बोलनेवालों की हार हुई है
 धारा-३७० रद्द करेंगे, मतलब करेंगे ही
 देशद्रोह की धारा करनेवालों की हार हुई
 ओवैसी को वंदे मातरम बोलने में शर्म क्यों आती है?