प्रोएक्टिव सरकार

बीते कुछ महीनों से जिस तरह से प्रोएक्टिव होकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ताबड़तोड़ निर्णय लिया है, उससे देसी और विदेशी निवेशकों में यह संदेश गया है कि सरकार अब निवेशकों की सुन रही है। आज के इस दौर में हिंदुस्थान का नया कॉर्पोरेट टैक्स जो की नई निर्माण यूनिट लगाने पर लगा है, वह विश्व में बहुत आकर्षक है और दक्षिण एशियाई देशों में कम है। चीन से पलायित हो रही कंपनियों के पास हिंदुस्थान एक विकल्प के रूप में उभर रहा है।
अब सरकार उत्साहित होकर एवं आगे बढ़कर निवेशकों के चेहरे पर खुशी एवं विदेशी मुद्रा आय बढ़ाने के लिए शेयरों से जुड़े कुछ टैक्स में भी राहत देने का विचार कर रही है और इसमें प्रमुख है लाभांश कर की समीक्षा, जिसकी लंबे समय से मांग थी। कंपनी जो लाभांश अपने शेयरधारकों को भुगतान करती है, उसके ऊपर १५ प्रतिशत उसे लाभांश वितरण कर जिसे डीडीटी भी कहते हैं, उसे भी देना पड़ता है। इसके ऊपर अलग से सरचार्ज और एज्युकेशन सेस भी देना पड़ता है और यह टैक्स कार्पोरेट टैक्स के अतिरिक्त उसे देना होता है यदि शेयरधारक अपना लाभ लाभांश के रूप में लेना चाहते हैं तो। ज्ञातव्य हो को कंपनियों में शेयरधारक अपना लाभ सिर्फ लाभांश के रूप में ही निकाल सकते हैं, अन्य किसी रूप में नहीं। अत: यह साधारण आयकर के अतिरिक्त एक दोहरा कर भार उनके ऊपर पड़ जाता है, जिसके कारण बहुत से प्रोजेक्ट वर्क वेंचर कॉर्पोरेट फॉर्म होने से कतराने लगे थे इसलिए सरकार शेयर से जुड़ी समग्र टैक्स संरचना को सरल बनाने पर विचार कर रही है ताकि दोहरे कर भार से बचाव हो सके। इसके अलावा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदुस्थानी शेयर बाजार में विदेशी पेंशन कोष के निवेश के रास्ते में लाभांश वितरण कर भी एक प्रमुख बाधा है और सरकार को इसे प्रमुखता से एड्रेस करना चाहिए और जिसे अब प्रोएक्टिव होकर कर भी रही है। हाल ही में प्रत्यक्ष कर में सुधार के लिए गठित एक कार्यदल ने भी लाभांश वितरण कर को कम करने का सुझाव दिया है।
सरकार बाजार में वैâश फ्लो बढ़ाने हेतु बजट में आवंटित राशि को खर्च करने का भी दबाव बना रही है। सभी सरकारी विभाग को पुराने बकायों को शीघ्रता से निपटाने का निर्देश दिया है ताकि बाजार में वैâश फ्लो आए। सभी सरकारी बैंकों को एमएसएमई को बिना किसी कठिनाई के नियमानुसार लोन देने के लिए कहा गया है। सरकारी बैंकों को मिलाकर चार बड़े बैंक बनाने की भी घोषणा सरकार ने की है, जो यह बताता है कि सरकार हालात पर प्रतिक्रिया दे रही है और हाथ पर हाथ धरकर भगवान भरोसे नहीं बैठी है।
दिवाली के बाद बाजार ने भी इकोनॉमी का झूमकर स्वागत किया और शेयर बाजार बुधवार को तेजी के साथ खुला और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने ४० हजार का आंकड़ा पार कर लिया, वहीं निफ्टी भी बढ़त के साथ बुधवार को कारोबार कर रहा था।
टैक्स में मिली छूट आगे और होनेवाली कटौती के अनुमान दिवाली, धनतेरस एवं छठ के इस त्योहारी मौसम में भरपूर खरीदी एवं ऑटो सेक्टर व अन्य सेक्टर में अच्छी बिक्री और कंपनियों के बेहतर दूसरी तिमाही के रिजल्ट के बाद भौतिक बाजार और शेयर बाजार में अच्छी उम्मीद नजर आ रही है। इस तिमाही में कंपनियों के बेहतर परिणाम और अमेरिका-चीन के बीच व्यापार समझौते की उम्मीद से भी बाजार में सकारात्मक धारणा बनी हुई है।
मेट्रो के अलावा छोटे शहरों और कस्बों में भी इस बार खरीददारी हुई है और डिजिटल भुगतान की संख्या बढ़ी है। इस त्योहारी अक्टूबर माह में यूपीआई में ही केवल १अरब रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ है, जो इस बात का संकेत देता है कि बाजार बदलाव को स्वीकार कर रहा है और अब पेमेंट डिवाइस की जरूरत व्यापार में बाधा नहीं बन रही है।
घाटे में चल रही सरकारी कंपनियों को भी सरकार अब पेशेवर हाथों में देना चाहती है कि सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को बेचने के लिए हो सकता है कि सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों को ढीला करे। कारोबारी सुगमता के मामले में भी हिंदुस्थान की छवि सुधर रही है और देश लगातार इसमें सुधार कर रहा है। अब हिंदुस्थान वर्ल्ड बैंक के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस २०२० के सर्वे में १४ स्थानों की लंबी छलांग मारते हुए ६३वें स्थान पर पहुंच गया है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में हिंदुस्थान के उल्लेखनीय सुधार के प्रयासों की वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में सराहना की है। मोदी सरकार में पिछले ६ सालों में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रिपोर्ट में हिंदुस्थान ने ७९ अंकों की छलांग मारी है। २०१४ में हिंदुस्थान कारोबारी सुगमता के मामले में १४२वें स्थान पर था, जो २०१९ में सुधरकर ६३वें स्थान पर आ गया है।
सरकार उद्यम व्यापार और रोजगार के नए नए विंडो खोलने पर भी काम कर रही है। अब नए बदलावों के आधार पर छोटी और गैर-तेल क्षेत्र की कंपनियां भी पेट्रोल-डीजल की खुदरा बिक्री के कारोबार में उतर सकती हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में यह पैâसला किया गया है, इसके साथ ही इसमें वाहन र्इंधन के वितरण का लाइसेंस देने की नीतियों में बदलाव को मंजूरी दिया गया है। पहले उन्हीं कंपनियों को इस क्षेत्र में प्रवेश की इजाजत थी, जिन्होंने पहले से तेल एवं गैस सेक्टर, खासकर एक्सप्लोरेशन और उत्पादन, रिफाइनिंग, पाइपलाइन या टर्मिनल आदि में निवेश किया हुआ था। अब इसकी जरूरत खत्म कर दी गई है। पेट्रोल-डीजल की खुदरा बिक्री का लाइसेंस लेने के लिए कंपनी के न्यूनतम नेटवर्थ की सीमा को घटाकर २५० करोड़ कर दिया गया। पहले २,००० करोड़ रुपए के पूर्व निवेश की शर्त थी। नई कंपनियों को अपने आउटलेट पर तीन साल के अंदर सीएनजी, एलएनजी, बायोफ्यूल्स, इलेक्ट्रिक चार्जिंग आदि वैकल्पिक र्इंधन बेचने की व्यवस्था भी करनी होगी।
सीसीईए के बयान को मानें तो वाहन र्इंधन की खुदरा बिक्री का लाइसेंस देने की पुरानी नीतियों में २००२ से अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ था। बाजार के नए तौर-तरीके को देखते हुए और निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतियों में यह बदलाव प्रासंगिक था, जिस कारण सरकार ने यह बदलाव किया है, इसके तहत अब विदेशी कंपनियां भी अलग ब्रांड के पेट्रोल-डीजल पंप स्थापित करने के लिए लाइसेंस ले सकती हैं। कुल मिलाकर सरकार का इकोनॉमी में जड़ की बजाय प्रतिक्रियावादी होना ही अपने आप में एक सुखद संयोग है, जो यह बताता है कि सरकार जिंदा है और प्रयास कर रही है।