प्लास्टिक से लड़ेंगे ठाणे के वॉरियर्स

प्लास्टिक पूरी दुनिया के पर्यावरण को बर्बाद कर रही है। दुनिया को बचाना है तो प्लास्टिक को हराना है। कुछ इसी मंत्र के साथ ठाणे के वॉरियर्स (लड़ाके) प्लास्टिक को हराने के लिए मैदान में उतरे हैं। उनका कहना है कि इस प्लास्टिक के संकट से दुनिया को बचाना है तो प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूर्ण रूप से रोका जाना जरूरी है।
ठाणे के ये वॉरियर्स दरअसल चार युवाओं का इक समूह है। इन युवाओं ने अपनी दिनचर्या में इस्तेमाल होनेवाली प्लास्टिक की वस्तुओं का इस्तेमाल पूरी तरह से बंद कर दिया है। अब वे समाज को भी इसके प्रति जागरूक कर रहे हैं। ठाणे की रहनेवाली अमृता मोहन (२६) ने बताया कि उनके द्वारा प्लास्टिक के कचरे का निर्माण न हो इसलिए वह अपने ही घर पर टूथपेस्ट बनाती हैं। साथ ही वे बांस के ब्रश का इस्तेमाल करती हैं।
उनका कहना है कि सेनेटरी नैपकिन में कुछ हद तक प्लास्टिक का समावेश होता है इसलिए वे सैनेटरी पैड का इस्तेमाल न कर सिलिकॉन के कपड़े से बने मेंस्टुअल कप का इस्तेमाल करती हैं। पिछले एक वर्ष से वह प्लास्टिक की वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं। मुलुंड के रहनेवाले पवित्र श्रीवास्तव ने बताया कि सबसे घातक कचरा कहें तो प्लास्टिक है क्योंकि उसे नष्ट करना लगभग असंभव ही है, इसलिए प्लास्टिक के इस्तेमाल से दूर रहकर कचरा कम करने से भविष्य सुरक्षित हो सकता है। इसलिए पवित्र फटे-पुराने कपड़ों का इस्तेमाल कर बैग बनाते हैं। अब तक उन्होंने अपने दोस्तों को १० से अधिक बैग बनाकर दिए हैं और साथ ही वे अपने दोस्तों को प्लास्टिक इस्तेमाल न करने की सलाह भी देते हैं।
ठाणे के रहनेवाले शुशांक तोमर (२२) ने बताया कि हमारे घर में जीरो प्लास्टिक यूज की नीति अपनाई जा रही है। इसलिए मैं खुद से ही शेविंग जेल, टूथपेस्ट, बांस का ब्रश, कांच की बोतल और जब तक कपड़े पूरी तरह फट नहीं जाते तब तक उसका इस्तेमाल करता हूं।
ठाणे के रहनेवाले प्रणव त्रिवेदी ने बताया कि हमारा पूरा परिवार प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करता। घर पर ही टूथपेस्ट बनाकर इस्तेमाल करते हैं, साथ ही प्लास्टिक की चीजें बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं करते।