प्लेटफॉर्म से हटे, लोकल में डटे, टारगेट के लिए टीसियों की क्लास

वित्तीय वर्ष पूरा होने को है और हर कोई अपने सालाना कमाई का टारगेट पूरा करने में लगा है, इससे रेलवे भी अछूती नहीं है। इन दिनों वित्तीय वर्ष २०१८-१९ का टारगेट पूरा करने के लिए पश्चिम रेलवे के टीसी प्लेटफॉर्म से हटकर लोकल ट्रेनों में डटे हुए हैं। टारगेट पूरा करने के लिए टीसियों की यह क्लास वाणिज्य विभाग ने लगाई है।

बता दें कि पश्चिम रेलवे मुंबई डिविजन के वाणिज्य विभाग ने साल २०१८-१९ के लिए ६० करोड़ रुपए कमाई का टारगेट रखा था। टारगेट के मुताबिक अभी वाणिज्य विभाग को महज १५ दिनों में करीब ८ करोड़ ७० लाख रुपए का टारगेट बिना टिकट यात्रा करनेवाले यात्रियों की धर-पकड़ कर पूरा करना है। इस टारगेट को मार्च में ही पूरा करने के लिए पश्चिम रेलवे के वाणिज्य विभाग ने एक आदेश पारित किया है, जिसमें प्लेटफॉर्म पर ड्यूटी करनेवाले सारे टीसियों को लोकल ट्रेन में चढ़कर यात्रियों का टिकट जांचने का आदेश दिया गया है। मेल एक्सप्रेस ट्रेन के टीसियों को एक दिन में ९ हजार रुपए का टारगेट पूरा करने के लिए कहा गया है जबकि लोकल ट्रेन व प्लेटफॉर्म पर ड्यूटी करनेवाले टीसियों को एक दिन का टारगेट ७ हजार रुपए दिया गया है। टीसियों का कहना है कि यह टारगेट पूरा करना असंभव है। एक टीसी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बिना टिकट यात्रा करनेवाले यात्रियों को पकड़ने के बाद जुर्माना वसूलते समय हमें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कुछ यात्रियों के पास १०० रुपए तो किसी के पास १५० रुपए निकलते हैं। हर कोई यात्री पूरा जुर्माना नहीं दे पाता। वहीं रेलवे अधिकारी रेलवे बोर्ड की गाइडलाइन का भी उल्लंघन कर रहे हैं। रेलवे की गाइडलाइन के मुताबिक कुल कर्मचारी बल का ८५ फीसदी टीसियों का बल यात्री सुविधा में होना चाहिए। उनका काम टिकट जांचने सहित पूछताछ संबंधित यात्रियों की मदद करना, रेल परिसर की साफ-सफाई देखना आदि है। पश्चिम रेलवे मुंबई डिविजन में कुल १,०५० टीसी हैं, जो इन दिनों टारगेट पूरा करने के लिए लोकल ट्रेनों में डटे हुए हैं।

‘इंडियन टिकट चेकिंग एसोसिएशन- मुंबई डिविजन’ के पूर्व अध्यक्ष सूर्यकांत चव्हाण का कहना है कि अधिकारी टारगेट पूरा करने के लिए टीसियों पर दबाव डालते हैं। चव्हाण के अनुसार रात ८ बजे के बाद प्लेटफॉर्म और लोकल ट्रेनों में टीसी नहीं दिखेंगे। टीसी को यदि अधिकारी १० बजे तक ड्यूटी करने के लिए पहले कहते तो टारगेट पूरा किया जा सकता था लेकिन अंतिम समय में अधिकारी नींद से जगकर अपना फरमान जारी कर रहे हैं।