फकीर के गेटअप में ‘डी’, हर जुमा आलमशाह बाबा की दरगाह पर वेश बदलकर जाता है

‘मरता क्या न करता’ यह बात ग्लोबल टेररिस्ट दाऊद इब्राहिम पर काफी सटीक बैठती है। पाकिस्तान की सरजमीं पर आईएसआई की पनाहगाह में छिपे ‘डी’ पर खुफिया एजेंसियों का शिकंजा कसता जा रहा है। दाऊद के हिंदुस्थान प्रत्यर्पण के लिए अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई भी हिंदुस्थानी खुफिया एजेंसी की मदद में आगे आई है। अपने ऊपर बढ़ता शिकंजा देखकर दाऊद भी अपना मुखौटा और वेश बदलने लगा है। हाल ही में हिंदुस्थानी सरकार द्वारा ‘डी’ के खिलाफ बनाए गए २८० पन्नों के डोजियर में इस बदलते मुखौटे का उल्लेख भी हुआ है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों की बातों पर भरोसा करें तो ‘डी’ ने फकीर (भिखारी) का गेटअप अपनाया है। हालांकि यह गेटअप वह सिर्फ जुमे (शुक्रवार) के दिन ही अपनाता है। फकीर के वेश और चोले का इस्तेमाल दाऊद कराची की एक दरगाह पर हाजिरी लगाने के लिए करता है। यह दरगाह आलम शाह बाबा की बताई जाती है।

बता दें कि १९९३ बम धमाके का मुख्य सूत्रधार और ग्लोबल टेररिस्ट दाऊद इब्राहिम को दबोचने की तैयारी हिंदुस्थानी सरकार ने शुरू कर दी है। इसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई भी साथ दे रही है। पिछले दिनों एफबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों के साथ हो चुकी है।
इस दौरान दाऊद द्वारा कॉस्मेटिक सर्जरी कर बदले गए चेहरे की तस्वीर भी एजेंसियों ने एफबीआई के साथ साझा की है। बदलते चेहरे के साथ-साथ दाऊद के वेश बदलने की भी चर्चा दाऊद के गढ़ डोंगरी में खूब हो रही है। इस चर्चा पर भरोसा करें तो दाऊद ने इस बार फकीर का चोला अपनाया है। यह चोला वह कराची में स्थित अपनी पसंदीदा आलम शाह बुखारी की दरगाह पर माथा टेकने के दौरान पहनता है। सुरक्षा एजेंसियों की निगाह में न आए इसलिए दाऊद हर शुक्रवार को फकीर के वेश में इस दरगाह पर जाता है। जुमे की नमाज अता करने के बाद वह दरगाह पर दुआएं मांगता है। चर्चा ऐसी भी है कि दाऊद पर जब भी मुसीबत आती है तो वह इसी दरगाह की ओर रुख करता है। इतना ही नहीं, इस दरगाह परिसर से ही कुछ दूरी पर एक कब्रिस्तान भी है। डोंगरी में यह बात भी आम है कि इस कब्रिस्तान में एक ऐसे बुजुर्ग की कब्र है, जिन्होंने दाऊद का रूहानी इलाज भी किया था। कहा जाता है कि जुमे के दिन इस दरगाह के बाद दाऊद बुजुर्ग की कब्र पर जाकर प्रार्थना करता है। बताया ये भी जाता है कि इस धार्मिक कार्यक्रम के बाद दाऊद पाकिस्तान में छिपे अपने पुराने गुर्गों के साथ दरगाह परिसर में बैठक भी करता है। गौरतलब हो कि दुबई में फारूख देवढ़िया और अबू बकर की धरपकड़ के बाद कई गुर्गे दुबई छोड़ पाकिस्तान पलायन कर चुके हैं। यही गुर्गे दाऊद से मुसाफा करने (हाथ मिलाने) के लिए जुमे के दिन इसी दरगाह पर हाजिरी लगाते हैं, ऐसी चर्चा मुंबई स्थित दाऊद के गढ़ में हो रही है।