" /> फरिश्ता बना एंबुलेंसकर्मी, रक्तदान कर बचाई महिला की जान

फरिश्ता बना एंबुलेंसकर्मी, रक्तदान कर बचाई महिला की जान

– गर्भपात होने के बाद भर्ती पत्नी को खून नहीं मिलने से हताश पति ने छोड़ दी थी उम्मीद  

एंबुलेंस देखकर ही मौत से जूझनेवाले मरीज को जिंदगी की आस बंध जाती है। कोरोना की दहशत के बीच एंबुलेंस के कर्मचारी सैकड़ों लोगों की उम्मीद बने हैं। शनिवार को भी 108 एंबुलेंस का कर्मचारी एक परिवार के लिए फरिश्ता साबित हुआ। एंबुलेंसकर्मी की नजर ब्लड बैंक के बाहर हताश पति पर पड़ी, जो पत्नी को बचाने की उम्मीद खो चुका था। पत्नी अस्पताल में भर्ती थी और उसे बचाने के लिए बी निगेटिव की जरूरत थी। ब्लड बैंक में बी निगेटिव रक्त नहीं था, ऐसे में एंबुलेंसकर्मी ने अपना खून देकर महिला की जान बचाई।

अमरोहा जिले के नौगांवा सादात की एक महिला चार माह की गर्भवती थी। गर्भपात होने के बाद महिला को गंभीर हालत में महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला का ब्लड ग्रुप बी निगेटिव था। अत्यधिक रक्तस्राव होने पर उसे तीन यूनिट ब्लड चढ़ाना था। पति और उसके परिचित ने रक्तदान कर दो यूनिट ब्लड बैंक से ले लिया लेकिन तीसरी यूनिट के लिए न तो डोनर मिला और न ही ब्लड बैंक में बी निगेटिव ब्लड ग्रुप था। पति हताश होकर ब्लड बैंक के बाहर रो रहा था। वह पत्नी को बचाने की उम्मीद छोड़ चुका था। इसी बीच वहां से इमरजेंसी 108 एंबुलेंस गुजरी। इसमें एंबुलेंस प्रभारी राहुल यादव, जितेंद्र सिसौदिया, सुनील कुमार और अमित यादव थे। पति को रोता देख एंबुलेंस रोकी और वजह पूछी। पति फूटकर रोने लगा। प्रभारी राहुल यादव ने उसके आंसू पोंछकर महिला के लिए बी निगेटिव रक्तदान किया। राहुल ने कहा कि रक्तदान से बढ़कर कोई सेवा नहीं है।