" /> फिरौती लेकर अपहरित की हत्या और शव न मिलने की सीबीआई से जांच की मांग लेकर पैदल ही लखनऊ के लिए चल पड़े!

फिरौती लेकर अपहरित की हत्या और शव न मिलने की सीबीआई से जांच की मांग लेकर पैदल ही लखनऊ के लिए चल पड़े!

कानपुर के संजीत अपहरण और हत्या के बाद अभी तक शव न मिलने पर प्रशासन द्वारा सीबीआई जांच की बात आश्वासन बन कर रह गयी। इससे नाराज परिजन मुख्यमंत्री से मिल कर सीबीआई जांच कराने के लिए शुक्रवार की सुबह बर्रा से लखनऊ पैदल ही निकल पड़े। डीएम व डीआईजी के आश्वासन के बाद भी सीबीआई जांच शुरू न होने पर परिजनों का धैर्य आखिर जवाब दे गया।

बता दें कि 22 जून को अपहृत लैब टेक्नीशियन संजीत यादव की फिरौती देने पर भी अपहरणकर्ताओं ने हत्या कर दी थी। पुलिस ने मामले में महिला समेत छह लोगों को गिरफ्तार भी किया था लेकिन अब तक न तो संजीव का शव बरामद हुआ और न ही उसका बैग मोबाइल या अन्य कोई सामान। 2 अगस्त को परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर शास्त्री चौक पर धरना दिया तो शासन से वार्ता कर डीएम ने परिजनों को सीबीआई जांच का आश्वासन देकर शांत करा दिया था। शुक्रवार की सुबह संजीव के पिता चमनलाल, मां कुसमा देवी बहन रुचि, चाचा कश्मीर सिंह पुलिस को चकमा देकर घर से निकल गए। इसके बाद सामाजिक संस्था ऑपरेशन विजय व सैकड़ों लोग अन्य परिजनों के साथ बड़ागांव से होते हुए बर्रा हाईवे पर पहुंच गये। अपने हाथों में तख्तियां लिए हुए थे।जिनमें “संजीत का शव बरामद करो” “पुलिस प्रशासन होश में आओ और संजीत के परिवार को न्याय दो” जैसे स्लोगन लिखे हुए थे।

हाईवे पर करीब 250 लोगों के पैदल मार्च के चलते वाहनों की लंबी कतारें लग गई। सीओ गोविंद नगर सर्किल फोर्स के साथ पहुंचे और परिजनों को बर्रा बाईपास पर रोकने का प्रयास किया लेकिन वह रुके नहीं। इस दौरान उनके परिजनों से झड़प भी हुई। बहन रुचि का कहना है कि पुलिस ना तो अब तक संजीव का शव बरामद कर पायी है और ना ही सीबीआई जांच शुरू हुई है। सड़क पर आ रहे ट्रक के आगे रुचि और उसकी मां कुसमा लेट गईं। एसपी साउथ दीपक भूकर के सामने पिता चमन लाल ने गमछे से अपना गला कसने का प्रयास किया। किसी तरह पुलिस ने ट्रक को रुकवाया और दोनों ओर से बेरीकेडिंग लगाकर वाहन खड़े करवा दिए। हाईवे पर करीब एक घंटे से हंगामा चलता रहा और भीषण जाम लग गया। प्रशासन के बहुत समझाने के बाद संजीत यादव के परिजनों ने एसीएम प्रथम को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन दिया। संजीत के पिता चमनलाल ने बताया कि एसीएम ने उन्हें दो दिन के अंदर मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का आश्वासन दिया है। लिखित आश्वासन मिलने के बाद परिजनों ने लखनऊ मार्च और प्रदर्शन खत्म किया।