फिर से ‘हाथसफाई’

कर्नाटक विधानसभा के लिए १२ मई को मतदान हुआ और १४ मई को केंद्र सरकार ने र्इंधन मूल्य वृद्धि की तलवार फिर से बाहर निकाल ली। सोमवार से लगातार तीन दिन से मूल्य वृद्धि का झटका दिया जा रहा है। सोमवार को पेट्रोल का भाव १७-१८ पैसे बढ़ गया और मुंबई में डीजल प्रति लीटर ७० रुपए २० पैसे से बढ़कर ७० रुपए ४३ पैसा हो गया। बुधवार को पेट्रोल का भाव प्रति लीटर ८२.९४ रुपए और डीजल का भाव ७०.८८ रुपए हो गया। मतलब तीन दिनों में पेट्रोल ४६ से ५० पैसे और डीजल ४८ से ६९ पैसे बढ़ गया। कर्नाटक चुनाव की धूम समाप्त हो गई है। फिलहाल वहां सत्ता के लिए रस्साकशी शुरू है। वह जब खत्म होगी तब होगी लेकिन तब तक पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि का ‘खेल’ शुरू करने में कोई ऐतराज नहीं है, केंद्र सरकार की नीति कुछ ऐसी ही दिख रही है। फिलहाल बाजार में ‘कृत्रिम मूल्य वृद्धि’ के लिए व्यापारी वर्ग को आरोपी के कटघरे में खड़ा किया जाता है। पहले कर्नाटक चुनाव के लिए र्इंधन मूल्य वृद्धि रोककर रखना और मतदान समाप्त होने के पश्चात उस पर से नियंत्रण हटा लेना, यह भी एक प्रकार की ‘कृत्रिम मूल्य वृद्धि’ जैसा ही है। केवल यह मूल्य वृद्धि ‘सरकार प्रायोजित’ है। चुनाव के दौरान मूल्य वृद्धि हुई होती तो इस पर आक्षेप लेने के लिए विरोधियों को एक मुद्दा मिल गया होता इसलिए वैश्विक बाजार में खनिज तेलों की कीमत प्रति बैरल ७२ डॉलर्स से भी ज्यादा होने के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल का भाव स्थिर रखने का ‘चमत्कार’ हुआ। अगर कर्नाटक चुनाव न होता तो यह चालाकी सरकार को सूझती क्या? लेकिन ऐसे सवाल फिलहाल नजरअंदाज कर दिए गए हैं। मानो कर्नाटक का चुनाव होने तक ‘नुकसान सहो लेकिन र्इंधन मूल्य वृद्धि मत करो’ जैसा निर्देश ही केंद्र ने सरकारी तेल कंपनियों को दे रखा था। अब वह बाधा दूर हो गई है और २४ अप्रैल से रोककर रखी गई र्इंधन मूल्य वृद्धि का ‘बांध’ खुल चुका है। मतलब चुनाव होने तक कृत्रिम सस्ताई और चुनाव होने के बाद फिर से महंगाई जैसा यह ‘जुमला’ है। गत ४ वर्षों से केंद्र और राज्य में यही ‘हाथसफाई’ का खेल शुरू है। किसानों की कर्जमाफी के संदर्भ में भी यही हुआ। घोषणा की गई तब कर्जमाफी का आंकड़ा लगभग ३४ हजार करोड़ था। फिर अलग-अलग कारणों से २०-२२ हजार करोड़ तक वह नीचे लाया गया। उसमें कितने किसानों को कर्जमाफी का लाभ हुआ इसका ‘आंकड़ा’ फिलहाल किसी के पास नहीं है और कर्जमाफी की समयावधि पिछले पृष्ठ से आगे की ओर शुरू है। यह समयावधि अब फिर २० मई तक बढ़ा दी गई है। यही बात मेक इन इंडिया, स्मार्ट सिटी, स्टार्टअप इंडिया, मैग्नेटिक महाराष्ट्र आदि योजनाओं में भी है। हाथसफाई का खेल शुरू है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव पर नजर रखते हुए र्इंधन मूल्य वृद्धि के बारे में ऐसा खेल खेला गया। इसलिए २४ अप्रैल से २३ मई की कालावधि में वैश्विक बाजार में खनिज तेल की कीमत लगभग ४५ प्रतिशत बढ़ने के बावजूद हमारे देश में पेट्रोल-डीजल की दर में एक भी पैसे की वृद्धि नहीं हुई। अब मूल्य वृद्धि की मार जनता को फिर से अपना मुंह दबाकर सहने की मानसिक तैयारी रखनी होगी। तब तक बोतलबंद किए गए र्इंधन मूल्य वृद्धि का भूत जनता के सर पर बैठा दिया गया है। कर्नाटक में चुनाव समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार ने फिर से एक बार ‘हाथसफाई’ का प्रयोग किया है।