फिल्मी कहानी बनी हकीकत

कोई भी उपन्यासकार जब कोई उपन्यास लिखता है तो वह अपनी कल्पना के आधार पर ही लिखता है। उसका किसी यथार्थ से कुछ लेना-देना नहीं होता। वह अपनी कपोल कल्पना के माध्यम से शब्दों के मोती पिरोकर एक सुंदर रचना या लेख तैयार करता है, जिसे पढ़कर या सुनकर लोग प्रभावित होते हैं। मान लो अगर लेखक की वह कल्पना किसी के जीवन की यथार्थ बन जाय तो उसे आप क्या कहेंगे? उसे अजीब संयोग ही कहेंगे ना?
यह बात उन दिनों की है जब हिंदी एवं बंगला फिल्मों के मशहूर-निर्माता-निर्देशक विमल राय किसी बंगाली लेखक का बंगला उपन्यास पढ़ रहे थे। यह बात १९५५ की है। उन्होंने उस उपन्यास पर आधारित हिंदी फिल्मी ‘अमृत कुंभ की खोज’ फिल्म बनाने का निर्णय लिया। उस उपन्यास के अनुसार कहानी के मुख्य पात्र को टीवी हो जाती है और वह ‘जोग’ स्नान के लिए (इलाहाबाद) प्रयागराज आता है। प्रयागराज के बारे में कहा जाता है कि यहां लगनेवाले कुंभ में अगर कोई इंसान ‘जोग’ स्नान करे तो उसे बीमारियों से छुटकारा मिल जाता है। इसी तरह उपन्यास का पात्र अपनी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए ‘जोग’ स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचता है और उस मेले में हुई भगदड़ में पहले दिन ही उसकी मौत हो जाती है। जब कि जोग स्नान नौवें दिन होता है। विमल दा अपने सहायक गुलजार को बुलाकर उस उपन्यास पर आधारित स्क्रिप्ट तैयार करने के लिए कहा। १९५९ में गुलजार उस उपन्यास पर स्क्रिप्ट लिखने बैठ गए। जब भी समय मिलता दादा के पास जाते उनसे इनपुट लेते फिर लिखने लगते। दादा ने गुलजार से कहा कि १९६२ की सर्दियों में हम प्रयागराज में शूटिंग करेंगे। उन्होंने अपने सहायक गुलजार से कहा कि आप प्रयागराज जाकर भीड़वाला सीन कर लो। बाद में हम हीरो को ले जाकर ‘जोग’ स्नानवाला सीन कर लेंगे। एक दिन दादा की तबीयत खराब हो गई। इलाज के दौरान पता चला कि उन्हें वैंâसर है। उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। कहानी के मेन हीरो को पहले दिन प्रयागराज पहुंचकर तीसरे-पांचवे या नौवें दिन जिस दिन ‘जोग’ स्नान होता है उसी दिन मरना था। १९६४ का कुंभ मेला नजदीक आ रहा था। विमल रॉय की हालत गंभीर होती जा रही थी। उन्हें उस सीन को महाकुंभ के मेले में ही शूट करना था। १९६४ का ३१ दिसंबर खत्म हो गया। ८ जनवरी १९६५ को ‘जोग’ स्नान था। उसी दिन उस उपन्यास के नायक को मरना था लेकिन उस दिन उपन्यास का नायक तो नहीं लेकिन इस फिल्म का निर्माण करनेवाला-निर्माता निर्देशक विमल रॉय इस दुनिया से अलविदा हो गए।