फ्लाय कर गए फ्लेमिंगो, मेहमाननवाजी से चूक गई मुंबई

मुंबई सहित आसपास के दलदली क्षेत्र (वेटलैंड) में हर वर्ष ठंड की शुरुआत होते ही बड़ी तादाद में फ्लेमिंगो आते हैं। फ्लेमिंगो हमेशा से ही लोगों के आकर्षण केंद्र रहे हैं लेकिन इस वर्ष साइबेरिया व अन्य प्रांत से आनेवाले सारस यानी फ्लेमिंगो पक्षी मुंबई के ऊपर से फ्लाय कर गुजरात पहुंच गए हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में मानव द्वारा की जा रही चूक जैसे प्रदूषण, उससे होनेवाले मौसम में बदलाव, वेटलैंड के साथ छेड़छाड़ और कांक्रीटीकरण के चलते इस बार आम मुंबईकर और पक्षी प्रेमी फ्लेमिंगो की मेहमाननवाजी से चूक गए हैं। मुंबई में आनेवाले फ्लेमिंगो की संख्या में ७३ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। फ्लेमिंगो की संख्या कम होने के चलते पक्षी प्रेमी इस बार काफी निराश हैं।

बता दें कि नवंबर महीने की शुरुआत से ही मुंबई के पूर्वी समुद्री स्थित वेटलैंड जैसे उरण, शिवड़ी, ठाणे व नई मुंबई की खाड़ियों में फ्लेमिंगो का आना शुरू हो जाता है। इन्हें देखने के लिए मुंबईकरों और पक्षी प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती हैं लेकिन इस बार नजारा कुछ अलग है। मई २०१८ से ही फ्लेमिंगो की निगरानी कर रही बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) के अधिकारी ने बताया कि २०१९ की तुलना में २०१८ में फ्लेमिंगो की उपस्थिति में ७३ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष २०१९ में जनवरी में एमएमआर के कुल १६ वेटलैंड्स में १.२१ लाख फ्लेमिंगो की उपस्थिति दर्ज की गई थी जबकि वर्ष २०२० में जनवरी में अबतक केवल ३३,३३४ फ्लेमिंगो आए हैं। आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि मेहमानों की संख्या में काफी कमी आई है। इतना ही नहीं वर्ष २०१८ में नवंबर में ५१,९८८ और दिसंबर महीने में ५७,१८१ फ्लेमिंगो आये थे जबकि २०१९ में नवंबर में मात्र ७,००० और दिसंबर में केवल ७,११८ फ्लेमिंगो ने ही दस्तक दी थी।

फ्लेमिंगो पर अध्ययन कर रहे बीएनएचएस के अस्सिटेंट डायरेक्टर राहुल खोत ने कहा कि फ्लेमिंगो गुजरात से एमएमआर क्षेत्र में केवल खाने के लिए आते हैं क्योंकि नवंबर से गुजरात के यहां का पानी सूखने लगता है लेकिन इसबार मौसम का अलग ही मिजाज देखने को मिला। मॉनसून काफी देर तक था ऐसे में वहां अब भी फ्लेमिंगो के लिए पानी और खाना उपलब्ध है। हो सकता है कि जनवरी के आखिर में इब कच्छ के वेटलैंड का पानी सूखने लगे तो मुंबई का रुख फ्लेमिंगो कर सकते हैं। परेल के पशु अस्पताल के प्रमुख जे सी खन्ना ने बताया कि एमएमआर क्षेत्र में तेजी से हो रहे निर्माण विकास कार्यों के चलते दलदली क्षेत्र पर काफी बुरा असर पड़ रहा है। सिर्फ फ्लेमिंगो ही नहीं बल्कि अन्य पक्षी जो दूसरे देशों से मुंबई व आसपास के क्षेत्रों में आया करते थे उनके भी संख्या में गिरावट हुई हैं। मौसम में जिस तरह से बदलाव हो रहा है वह इन पक्षियों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है। जाहिर सी बात है जहां उन्हें मौसम अनुकूल लगेगा वे वहां ज्यादा समय बिताएंगे।