बंगाल का गुजरात बन गया है क्या?

बंगाल को गुजरात बनने नहीं दूंगी, ऐसा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है। राजनीतिक भाषा में इसे चेतावनी या धमकी कहा जाता है। ऐसी चेतावनी, धमकियों और रक्तपात के चलते प. बंगाल का जनजीवन इन दिनों अस्त-व्यस्त है। लोकसभा चुनाव के प्रचार से लेकर अब तक बंगाल में जो हिंसाचार हुआ, उसमें ५०० से अधिक कार्यकर्ताओं का खून हुआ और यह खूनी सिलसिला आज भी जारी है। जिनकी हत्याएं हुर्इं, वे संभवत: सभी लोग भाजपा के ही कार्यकर्ता हैं, ऐसा कहा जाता है। तृणमूल के लोग भी मारे गए, ऐसा ममता का कहना है। भाजपा के प्रचार के लिए जब अमित शाह कोलकाता गए तब उनकी प्रचार शोभा यात्रा में ‘राड़ा’ हुआ। उसमें ईश्वरचंद्र विद्यासागर की प्रतिमा की तोड़-फोड़ हुई। यह प्रतिमा अब नए रूप में स्थापित की गई है और उसी का अनावरण करते समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिर एक बार चेतावनी और धमकियों की भाषा बोली हैं। ममता कहती हैं ‘भाजपा बंगाल को गुजरात बनाना चाहती है। मैं जेल जाने को तैयार हूं लेकिन मैं ऐसा कदापि नहीं होने दूंगी।’ ममता आगे कहती हैं ‘बंगाल और बंगाली जनता की भावना तथा वहां की संस्कृति को यदि कोई हानि पहुंचाना चाह रहा होगा तो मैं उसे नहीं छोड़ूंगी।’ पश्चिम बंगाल के मौजूदा हालात निश्चित तौर पर क्या हैं तथा भविष्य में इस तरह के विस्फोट होनेवाले हैं, यह उसी का ट्रेलर है। जिनकी शोभायात्रा के दौरान हमले हुए थे, वे अमित शाह अब देश के गृहमंत्री बन गए हैं और ममता को जस का तस जवाब देने की क्षमता अमित शाह तथा भाजपा में है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर पश्चिम बंगाल के हालात पर चिंता व्यक्त की है। इसका सीधा अर्थ ऐसा है कि बंगाल पर राष्ट्रपति शासन का लोढ़ा चलाया जा सकता है और इस तरह की हलचल दिखाई देने लगी है। पश्चिम बंगाल में जो हुआ उसके लिए ‘गुजरात पैटर्न’ जिम्मेदार होने की बात ममता कहती हैं। इसलिए गुजरात नहीं बनने देंगे, इसका क्या मतलब समझें? कोलकाता तथा अन्य शहरों में जो गुजराती समाज है, उन्हें राज्य से बाहर निकालने की ये तैयारी है क्या? मोदी तथा शाह गुजराती हैं इसीलिए उनके बारे में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उनका काम करने का तरीका अलग है। मोदी अप्रत्यक्ष और अमित शाह खुले रूप से हिंदुत्व की भूमिका अपनाते हैं। पश्चिम बंगाल में ममता ने सेक्युलरवाद के नाम तले बांग्लादेशी मुसलमानों की खुशामद कर रही थीं। यह पैटर्न उन पर ही उलट गया। इस खुशामद को चुनौती देने के लिए भाजपा ने ‘जय श्रीराम’ का नारा दिया और हिंदू समाज ने अपने घुटते दम को खोल दिया। पश्चिम बंगाल में भाजपा के १८ सांसद चुनकर आए। यह गुजरात का हिंदुत्ववादी पैटर्न है। ममता के मुस्लिमों की खुशामद के अतिरेक के चलते पश्चिम बंगाल का हिंदू तैश में आ गया और उसने भाजपा के विकल्प का चयन किया। ऐसे में खुद के अधोपतन के लिए ममता खुद ही जिम्मेदार हैं। मुट्ठी से बालू सरकती है, उसी तरह राज्य ममता के हाथ से सरक रहा है। ममता सड़क पर या कार्यक्रम में दिखाई देने पर उन्हें चिढ़ाने के लिए लोग ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाते हैं और ममता गाड़ी से उतरकर उन लोगों से हुज्जत करती हैं। मुख्यमंत्री के पद पर आसीन व्यक्ति को यह शोभा नहीं देता। ‘जय श्रीराम’ बोलना ममता के राज्य में अपराध है क्या? ‘जय श्रीराम’ का जवाब देने के लिए कोलकाता में अब ‘जय हिंद, जय बंगाल’ का बोर्ड तृणमूल वाले लगानेवाले हैं। ये एक तरह की बेचैनी है। राज्य को बचाने के लिए ही इस तरह की कोशिश शुरू है। इससे क्या होगा? बंगाल का गुजरात बन गया है। कल को अयोध्या और बनारस भी बन जाएगा। प्रभु श्रीराम का कोप होने पर दूसरा और क्या होगा! हिंदुत्व भड़क उठा है। ये ममता के कारण हुआ। इसके लिए दीदी का आभार!