बंगाल का विस्फोट!, जिम्मेदार कौन?

पश्चिम बंगाल का चुनाव मुद्दों से हटकर मुक्कों पर आ गया है। तृणमूल कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी के बीच तनाव पहले से ही चरम पर था, जिसे देखते हुए चिंगारी उड़नी शुरू हो गई थी। लेकिन प्रत्यक्ष तौर पर अमित शाह की उपस्थिति में हिंसाचार का विस्फोट होगा, ऐसा नहीं लगा था। बंगाल की सभ्यता और संस्कृति को धब्बा लगानेवाला मामला मंगलवार को कोलकाता में घटित हुआ। अमित शाह का कोलकाता में रोड शो था। उस दौरान भाजपा और तृणमूल कार्यकर्ता एक-दूसरे के साथ भिड़ गए। अमित शाह को ‘रोड शो’ आधा छोड़कर दिल्ली वापस लौटना पड़ा। लोकसभा चुनाव का जब आखिरी चरण चल रहा था तभी ये सब कुछ हुआ। पूरे देश में छोटी-छोटी घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो चुनाव शांति से संपन्न हुआ है। लेकिन पश्चिम बंगाल की भूमि इस बार पहली बार रणभूमि में तब्दील हो गई। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की। प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, योगी आदित्यनाथ की सभाओं का श्रीमती बनर्जी ने शुरू से ही विरोध किया। भाजपा नेताओं के हेलिकॉप्टर्स को कोलकाता तथा आसपास के अन्य स्थानों पर न उतरने देने का निर्णय ममता बनर्जी की सरकार ने लिया और तूफान की चिंगारी को खुद ही हवा दे दी। लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए भाजपा के बड़े नेताओं को पश्चिम बंगाल में प्रचार के लिए कदम भी न रखने देना ये वैâसी दादागीरी? ममता बनर्जी गुजरात में मोदी या शाह के खिलाफ प्रचार में गई होतीं तो उन्हें कोई नहीं रोकता। लोकतंत्र ने यह स्वतंत्रता सभी को दी है जबकि पश्चिम बंगाल तो हिंदुस्थान का एक हिस्सा ही है। वहां आने-जाने के लिए ‘वीजा’ की जरूरत नहीं पड़ती। पिछले कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल का सामाजिक मन बेचैन है। बांग्लादेश से लाखों घुसपैठिए पश्चिम बंगाल में आए हैं और ‘वोट बैंक’ की राजनीति के तहत ममता बनर्जी ने उन्हें पूरा संरक्षण दिया है। मुसलमानों के एकमुश्त वोटों के बल पर पश्चिम बंगाल को फिर से काबिज करने के उनके इस बेकार आत्मविश्वास को इस बार भाजपा के हिंदुत्ववाद ने डगमगा दिया। पश्चिम बंगाल में अब सीधे-सीधे हिंदू और मुसलमान इस तरह का विभाजन हो गया है और यह स्थिति बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्य के लिए घातक है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से ‘जय श्रीराम’ का नारा दिया जा रहा है। इस बात से ममता बनर्जी क्रोधित हैं। हम ‘जय हिंद’ और ‘वंदे मातरम’ का नारा देंगे, ऐसा श्रीमती बनर्जी कहती हैं लेकिन बंगाल के मुसलमान ‘वंदे मातरम’ का नारा देनेवाले हैं क्या? बंगाल का माहौल मंगलवार की घटना के बाद और भी भड़क उठा है। अमित शाह सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्हें रोकना ये पहली गलती और उनकी शोभायात्रा में निषेध जताना तथा काले झंडे दिखाना ये दूसरी गलती। अमित शाह की प्रचार यात्रा में श्रीराम, हनुमान उसी तरह रामायण के प्रसंगों की झांकी थी इसलिए मामला और भी भड़क उठा। ममता गरम दिमाग की हैं लेकिन राज करनेवाले को सिर पर बर्फ और जीभ पर शक्कर रखकर काम करना होता है। पश्चिम बंगाल में हुए हिंसाचार से राज्य प्रमुख के रूप में ममता का नाम खराब हुआ है। ईश्वरचंद्र विद्यासागर बंगाल में शाहू या महात्मा फुले की तरह समाज सुधारक थे। इस दंगे में उनकी मूर्ति को तोड़ा गया और इसका ठीकरा अब एक-दूसरे पर फोड़ा जा रहा है। जो हमारे विचारों जैसे नहीं हैं, उनके साथ इस तरह व्यवहार करना उचित तरीका नहीं। ममता बनर्जी की सरकार पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की राह से सत्ता में आई है। उसी लोकतंत्र की राह से उनकी फिर जीत या हार होगी। मोदी, शाह आदि नेताओं के रास्तों को रोककर वे सफल नहीं होनेवालीं। अमित शाह ‘भगवान’ नहीं हैं। उनके खिलाफ प्रदर्शन हुआ तो क्या बिगड़ गया? ऐसा सवाल ममता बनर्जी ने पूछा है। अमित शाह ईश्वर नहीं होंगे लेकिन ममता भी देवी दुर्गा या ‘संन्यासिन’ नहीं। पश्चिम बंगाल में पहले मार्क्सवादियों ने हिंसाचार बोया, उसी में उनकी बलि चढ़ी। अब ममता बनर्जी भी यही कर रही हैं। इससे राज्य झुलसता है। देश के लिए यह घातक है।