" /> बंगाल का साथ दो… सर्वनाश!

बंगाल का साथ दो… सर्वनाश!

कोरोना के संकट से दुनिया के ठप और स्तब्ध रहने के दौरान ही बुधवार को एक और आपदा हिंदुस्थान पर आन पड़ी। अम्फान नामक तूफान ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जमकर कहर बरपाया। विशेषकर पश्चिम बंगाल में इस चक्रवात से हुई तबाही का मंजर भयानक है। हिंदुस्थान के पूर्व में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर के तटीय राज्य आज तक कई चक्रवातों का सामना कर चुके हैं। लेकिन तूफान अम्फान इतना विनाशकारी था कि बांग्लादेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के सैकड़ों गांव तबाह हो गए। कुछ ही मिनटों में कई जिलों के कई घर जमींदोज हो गए। खेत नष्ट हो गए, बिजली के खंभे उड़ गए और लाखों पेड़ उखड़ गए। लगभग २०० किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ते तूफान ने पल भर में सब कुछ तहस-नहस कर दिया। खेत की खड़ी फसलें और बाग -बगीचे तबाह हो गए। तूफानी हवाएं, मूसलाधार बारिश और समुद्र से उठनेवाली विशाल लहरों के दृश्य रोंगटे खड़े कर देनेवाले थे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वॉररूम में बैठकर तबाही मचाते तूफान को अपनी आंखों से देखा। तूफान की भयावहता को देखकर ममता दीदी के मुंह से केवल एक शब्द निकला ‘सर्बोनाश’! यह प्रतिक्रिया ही अपने आप में बहुत कुछ कह देती है। ओडिशा की तुलना में पश्चिम बंगाल में मची तबाही सर्वनाश की तरह ही है। अकेले पश्चिम बंगाल में तूफान से ८० लोगों की मौत हो गई। ममता बनर्जी ने ५ लाख लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया, जिससे कई लोगों की जान बच गई। पश्चिम बंगाल के दक्षिणी हिस्से को चक्रवात ने मानो निगल लिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि तूफान अम्फान पूरी दुनिया को झकझोर देनेवाले कोरोना वायरस से कहीं अधिक गंभीर है। तूफान से हुई आर्थिक क्षति पश्चिम बंगाल की कमर तोड़नेवाली है। बिजली व इंटरनेट ठप है। सड़कें गायब हो गई हैं। जो सड़कें थोड़ी-बहुत बची हैं, वो उखड़े हुए पेड़ों से पटी पड़ी हैं। सवाल ये भी है कि प्रशासन यह सब सफाई करके सुदूर इलाकों के गांवों तक कैसे पहुंचेगा? उसके बाद ही नुकसान का सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार १ लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान होने का अनुमान ममता बनर्जी ने लगाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में तबाही का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद पश्चिम बंगाल के लिए १ हजार करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि बंगाल अपने पैरों पर फिर से खड़ा होगा। लेकिन सवाल ये है कि १ लाख करोड़ रुपए का नुकसान होने पर सिर्फ १ हजार करोड़ रुपए में बंगाल कैसे खड़ा होगा? तूफानी बारिश और समुद्र में उठनेवाली विशाल लहरों का खारा पानी तटीय क्षेत्रों के खेतों में घुस गया। समुद्री नमक वाले पानी के खेतों में घुस जाने से जो नुकसान हुआ है, उस नुकसान का आंकलन करना भी मुश्किल है। एक तरफ कोरोना संकट के कारण देशभर के सभी राज्यों की तिजोरियां खाली हो गर्इं। तीन महीनों में कोई नया राजस्व नहीं आया है और खर्च लगातार जारी है। ऐसी परिस्थिति में कोरोना से जूझते वक्त विनाशकारी तूफान अम्फान ने पश्चिम बंगाल में भयानक तबाही मचाई। इस प्रलयंकारी तूफान से हुई क्षति अकल्पनीय है। इस अप्रत्याशित आपदा में अकेले लड़ते पश्चिम बंगाल की तस्वीर उचित नहीं है। सियासी जूतों को एक तरफ रखते हुए सभी को पश्चिम बंगाल के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। यह ऐसा संदेश देने का समय है कि पूरा देश इस संकट की घड़ी में पश्चिम बंगाल के साथ है।