बंटाधार हो सकता है एमबीएमसी का बजट आमदनी-खर्च का कोई लेखा-जोखा नहीं

मीरा-भाइंदर महानगरपालिका के विभिन्न विभागों द्वारा किए जानेवाले खर्च का प्रतिवर्ष लेखापरीक्षण (ऑडिट) तो किया जाता है। मगर इन्हीं विभिन्न विभागों द्वारा प्रतिवर्ष होनेवाली आय का पिछले कई वर्षों से आंतरिक लेखापरीक्षण नहीं किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे आय और खर्च में तालमेल बैठाना कठिन हो गया है। इसका दुष्परिणाम मनपा के आर्थिक बजट (अर्थसंकल्प) पर पड़ने और इसके बंटाधार होने का खतरा मंडराने लगा है।
प्रत्येक आर्थिक वर्ष के आरंभ में मनपा प्रशासन द्वारा आर्थिक (बजट) सादर किया जाता है, जिसमें आगामी वर्ष में अनुमानित आय के अनुसार व्यवस्थाबद्ध खर्च की योजना समाविष्ट की जाती है। वहीं आर्थिक बजट को मान्यता मिल जाने के बाद अनुमानित आय मनपा की तिजोरी में जमा हो रही है की नहीं, अगर नहीं हो रही तो उसमें क्या त्रुटि है, इसका परीक्षण नहीं किया जाता है। परिणामत: वर्ष के अंतिम चरण में अनुमानित आय जमा नहीं होने की बात सामने आती है और इसका विपरीत परिणाम शहर के विकास कार्यों पर पड़ता है। मनपा के विभिन्न विभागों से अनुमानित की गई आय मनपा तिजोरी में जमा ही नहीं हुई है।

 वर्षों से नहीं हुआ आंतरिक लेखा परीक्षण
 आय और खर्च में तालमेल बैठाना कठिन
 वार्षिक अनुमानित आय मनपा तिजोरी में नहीं होती जमा
 आय के स्रोतों के आधार पर ही बनाया जाता है वार्षिक बजट
 आर्थिक बजट बंटाधार होने का खतरा
 शहर के विकास कार्यों पर विपरीत परिणाम