बंद फिल्मों की खुली कहानी

अमिताभ बच्चन के अभिनय जीवन का यह भी एक अनछुआ, अनकहा पक्ष है। उनके ५० वर्षोंवाले सुनहरे लंबे करियर में प्रदर्शित सफल-असफल फिल्मों की सूची अगर काफी लंबी है तो उनकी बंद फिल्मों की सूची भी छोटी नहीं है। महानायक की बंद फिल्मों की यह सूची भी आश्चर्य पैदा करती है। पहली फिल्म ‘मिर्जा गालिब’ से आरंभ हुई बंद फिल्मों की यह दुखद दास्तान भी अमिताभ बच्चन के करियर का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। फिल्मों का बंद होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। बड़े-बड़े कलाकारों की फिल्में बंद हो जाती हैं। किंतु अमिताभ बच्चन की बंद फिल्मों में ऐसे बड़े-बड़े निर्माता-निर्देशकों की बड़ी फिल्में भी शामिल हैं, जिन्होंने महानायक को लेकर सुपरहिट फिल्में बनाई हैं।
१९८७ में जब अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘देवा’ शानदार और विशाल मुहूर्त के बाद बंद हो गई थी तो बॉलीवुड में हड़कंप मच गया था क्योंकि एक तो ‘देवा’ के निर्माता-निर्देशक सुभाष घई जैसे बॉलीवुड के नामी शोमैन थे और दूसरे फिल्म के मुहूर्त पर ही २५ लाख रुपए से अधिक का खर्च उस समय आया था। ‘देवा’ सुभाष घई की एक महत्वाकांक्षी रचना थी, जिसे उन्होंने महानायक अमिताभ बच्चन के साथ महान फिल्म के रूप में प्लान किया था। ‘हमने ‘देवा’ के लिए अमित जी की टोपी-पगड़ी, पोशाक से लेकर हर चीज बड़े और शानदार स्तर पर प्लान थी। वे ‘देवा’ के चरित्र में सिनेमा के पर्दे पर यादगार पात्र के रूप में छा जाएं, हमारा सपना था। अफसोस, यह सपना अधूरा रह गया।’ सुभाष घई ने ‘सौदागर’ के आउटडोर में महाबलेश्वर की लोकेशन पर ‘देवा’ के बारे में पूछने पर बताते हुए कहा था।
‘देवा’ जैसी महत्वाकांक्षी फिल्म क्यों बंद हुई? इस जटिल प्रश्न को लेकर बॉलीवुड के लोग आज तक उलझन में हैं। इस प्रश्न के उत्तर में उस समय भी बहुत-सी कहानियां और अफवाहें फैली थीं। इन्हीं में जो कहानी विश्वसनीय सूत्रों से मुझे मिली वो बहुत दर्दनाक तो कदाचित अफसोसनाक थी। यह कहना आज भी कठिन है कि ‘देवा’ के बंद होने की यह कहानी कितनी और किस सीमा तक सही है? बताया गया था कि ‘फिल्मिस्तान’ स्टूडियो में ‘देवा’ की शूटिंग का पहला शेड्यूल ही आरंभ हुआ था कि एक दिन सुभाष घई ने अपने एक सहायक को अमिताभ बच्चन को बुलाने भेजा। सहायक अमिताभ को लेने के लिए मेकअप-वैन में गया तो कहते हैं अमिताभ ने कहा कि सुभाष घई को भेजें ताकि वे सीन को जान सकें। सहायक ने जब अपने बॉस को यह बताया तो सुभाष घई ने संदेश भेजा कि अमित जी से कहो वे सेट पर आ जाएं, सीन वहीं समझा दिया जाएगा। यह मामला इस कदर तूल पकड़ गया कि ‘ईगो’ का प्रश्न बन गया। न सुभाष घई सेट से बाहर आए और न अमिताभ सेट पर गए। मामला लंबा खिंच गया और कुछ देर बाद सेट पर पूरी यूनिट के सामने सुभाष घई ने घोषणा कर दी कि अब फिल्म की शूटिंग कभी नहीं होगी। वे ‘देवा’ को हमेशा के लिए बंद कर रहे हैं।
इस प्रकार ‘देवा’ बंद हो गई और आज तक इंटरनेट की वेबसाइट में भी ‘देवा’ के बंद होने का कारण ‘अनडिस्क्लोज रीजन’ बताया जाता है। इसी प्रकार कोई नहीं जानता कि ‘आसमान’, ‘एक दो तीन चार’ फिल्में घोषणा के बाद क्यों बंद हो गर्इं। अमजद खान तो अमिताभ के करीबी मित्रों में से थे, किंतु निर्देशक के रूप में अमिताभ को निर्देशित करने के लिए ‘लंबाई-चौड़ाई’ नामक फिल्म बनाने की घोषणा की लेकिन यह फिल्म भी बस घोषणा तक ही रह गई। ‘सिप्पी फिल्म्स’ ने सलीम-जावेद की कहानी पर ‘पत्थर के लोग’ की घोषणा की थी किंतु फिल्म बंद हो गई। निर्माता हबीब नडियादवाला ने ‘शोले’ वाले निर्देशक रमेश सिप्पी को लेकर ‘लाडला’ का मुहूर्त किया। अमिताभ बच्चन की आवाज में एक गीत ‘पड़ोसी अपनी मुर्गी संभाल, मेरा मुर्गा जवान हो गया’ रिकॉर्ड कराया गया और फिल्म के मुहूर्त पर इसी गीत से शुभारंभ किया गया। किंतु ‘लाडला’ भी शुभारंभ से आगे न बढ़ सकी। अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और जीनत अमान को लेकर आरंभ की जानेवाली ‘आरपार’ किस पार चली गई कुछ पता न चला। अमिताभ को लेकर कई हिट फिल्में ‘नसीब’, ‘मर्द’, ‘अमर अकबर एंथोनी’, ‘कुली’ बनानेवाले मनमोहन देसाई ने अमिताभ, विनोद खन्ना, रणधीर कपूर, ऋषि कपूर, अमजद खान, कादर खान को लेकर ‘गजब’ नामक मल्टीस्टार फिल्म की घोषणा बड़े जोर-शोर से की थी, किंतु फिल्म मुहूर्त के शोर में ही दबकर रह गई। ऐसा ही हश्र मनमोहन देसाई के भाई सुभाष देसाई की ‘सरफरोश’ का भी हुआ। फिल्म की शूटिंग भी शुरू हो गई थी और सुभाष देसाई के ऑफिस में ‘सरफरोश’ अमिताभ बच्चन का आकर्षक डिजाइन भी महीनों तक लगा रहा लेकिन बाद में यह फिल्म भी बंद हो गई। एक निर्माता के रूप में अभिनेता जीतेंद्र ने सलीम-जावेद की कहानी पर अमिताभ, जीनत अमान और हेमा मालिनी को लेकर ‘पानी’ नामक फिल्म शुरू की थी किंतु ‘पानी’ की कहानी वक्त के पानी में बह गई। ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘जंजीर’ जैसी सुपरहिट फिल्में बनानेवाले प्रकाश मेहरा ने ‘कायर’ और ‘जमीन’ बनाने की घोषणा की थी किंतु दोनों फिल्में कहीं आसमान में हवा हो गर्इं। ‘जमीन’ तो प्रकाश मेहरा का अंतर्राष्ट्रीय महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट था। इस फिल्म में वे अमिताभ बच्चन के साथ विश्वप्रसिद्ध मुक्केबाज मोहम्मद अली को लेकर अंग्रेजी और हिंदी में बनाना चाहते थे। ‘बॉम्बे टू गोवा’ में अमिताभ बच्चन को पहली बार हीरो का अवसर देनेवाले महमूद ने अमिताभ को लेकर ‘चीफ मिनिस्टर’ बनाने की घोषणा की थी किंतु फिल्म आगे नहीं बढ़ सकी। राहुल रवैल ने अमिताभ को लेकर ‘मस्त कलंदर’ नामक बड़ी फिल्म की घोषणा की थी किंतु बात नहीं बनी। ‘मस्त कलंदर’ में अमिताभ के साथ डिंपल कपऽड़िया, शशि कपूर, अमजद खान और अमरीश पुरी को लिया गया था किंतु इस बड़ी स्टार कास्ट के बावजूद फिल्म ‘मुहूर्त’ से आगे नहीं बढ़ सकी।