बच के रहना!, भीड़ के भेड़ियों तुम पे नजर है।

 

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई हमेशा आतंकियों के सॉफ्ट टारगेट पर रही है। भीड़ का फायदा उठाकर आतंकी अपने नापाक मंसूबे को अंजाम देते हैं। २६/११, ७/११, झवेरी बाजार, दादर कबूतरखाना बम धमाका जैसे कई उदाहरण हैं, जहां भीड़ में ये आतंकी भेड़िये मासूमों की जान के साथ खिलवाड़ कर चुके हैं। ऐसे में अब इन भेड़ियों से मुंबई को सुरक्षित रखने के लिए नई-नई योजनाओं को अमल में लाया जा रहा है। मुंबई के अधिकांश भीड़-भा़ड़वाले इलाकों में अब अत्याधुनिक वैâमरे लगाए जाएंगे, जो भीड़ में छिपे भेड़ियों को ढूंढ निकालेंगे। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबादेवी, हाजीअली दरगाह परिसर, माहिम दरगाह परिसर, सिद्धिविनायक मंदिर परिसर, मुंबई सेंट्रल, मरीन ड्राइव, जुहू चौपाटी, बांद्रा, बोरिवली, अंधेरी, भिंडी बाजार, शेयर मार्वेâट, बीकेसी आदि भीड़भाड़वाले इलाकों में कल १२५ वैâमरे लगाए जाएंगे। इस वैâमरे की खासियत यह है कि यह भीड़ में छिपे बदमाशों के चेहरे को स्वैâन कर पुलिस को अलर्ट करेगा। चरणबद्ध तरीके से ये वैâमरे मुंबई में आगामी कुछ वर्षों में लगाए जाएंगे। इन वैâमरों में उन बदमाशों के चेहरे फीड किए जाएंगे, जो पुलिस की लिस्ट में वांछित हैं। ऐसे में इन बदमाशों का भीड़ में बचना अब नामुमकिन है।
बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्रालय ने शहरों की सुरक्षा के लिए ‘निर्भया फंड’ का गठन किया है। इसके तहत राज्यों को निधि मुहैया कराई जा रही है। यह निधि सुरक्षा के लिहाज से शहरों में अत्याधुनिक यंत्रों का जाल बिछाने के लिए आवंटित की जा रही है। ६० प्रतिशत निधि केंद्र और ४० प्रतिशत निधि राज्य सरकार सुरक्षा के लिए देगी। मुंबई पुलिस के आला अफसर की मानें तो शहर में अतिरिक्त १,६०० सीसीटीवी वैâमरे आगामी तीन वर्षों में लगाए जाएंगे, जिनमें १२५ वैâमरे हाई रेज्युलेशन के हैं, जो बदमाशों के चेहरे स्वैâन करेंगे। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, मॉल, बाजारों आदि भीड़-भाड़वाले इलाकों में ये वैâमरे लगाए जाएंगे। सुरक्षा के लिए मिलनेवाले २५२ करोड़ रुपए में से २०० करोड़ रुपए सीसीटीवी वैâमरे, मोबाइल डाटा टर्मिनल, पीड़ितों को ट्रैक करने की प्रणाली, सायबर फॉरेंसिक और जीआईएस मैपिंग पर खर्च किए जाएंगे। मुंबई के चर्चित अपराधिक स्थलों की जीआईएस मैपिंग की जाएगी। जीआईएस मैपिंग के जरिए पुलिस इन आपराधिक स्थलों पर अपनी पैनी नजर रखेगी। चेहरा स्वैâन करनेवाले वैâमरे का प्रायोगिक इस्तेमाल गिरगांव चौपाटी पर मुंबई पुलिस गणेशोत्सव के दौरान कर चुकी है। इस प्रयोग में मुंबई पुलिस को सफलता भी मिली थी।

रु… २०० करोड़ खर्च
सीसीटीवी कैमरे, जीआईएस मैपिंग, मोबाइल डाटा टर्मिनल, सायबर फॉरेंसिक

भीड़भाड़वाले इलाके
छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस परिसर, मुंबई सेंट्रल, बांद्रा, भिंडी बाजार, कुर्ला, माहिम, मुंबादेवी, हाजीअली परिसर, जुहू-गिरगांव चौपाटी, बोरिवली, अंधेरी आदि।

संवेदनशील इलाके
रेलवे स्टेशन
बस स्टैंड
मॉल
बाजार
पर्यटक स्थल

बदमाशों का काम तमाम
वांछित अपराधियों के डाटा से सुसज्ज हाई रेज्युलेशन चेहरा स्वैâन वैâमरा भीड़-भा़ड़वाले इलाके में लगाया जाएगा। भीड़ को स्वैâन करते समय इस वैâमरे में जैसे ही किसी वांछित अपराधी का चेहरा स्वैâन होगा, तुरंत कैमरा मुंबई पुलिस के कमांड सेंटर को अलर्ट करेगा और फिर मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग टीम उक्त जगह पर फौरन पहुंच जाएगी।