बजट से बाहर हैं पनवेल-उरण के किफायती घर, २४ हजार घर खाली

रियल इस्टेट की हालत कितनी खस्ता है? इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि महामुंबई क्षेत्र में आनेवाले पनवेल और उरण में बने किफायती घर भी लोगों के बजट में नहीं आ रहे हैं। बिल्डरों द्वारा ग्राहकों को अनेक स्कीमें दी जा रही हैं इसके बावजूद खरीददार जरा भी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। विगत तीन साल से २४ हजार फ्लैट्स खाली पड़े हैं।
बता दें कि राज्य के अन्य जिलों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। पिछले तीन साल में ६ लाख ७० हजार घरों में से केवल ३ लाख ५० हजार घरों को खरीददार मिले। खाली पड़े घरों में से २४ हजार ५७७ घर महामुंबई क्षेत्र के हैं। गौरतलब है कि विगत ५ साल से निर्माण क्षेत्र में आर्थिक मंदी छाई हुई है। ग्राहकों को लुभाने के लिए घर खरीदने पर सोना, गाड़ी, प्रâी स्टैंप ड्यूटी, एनआरआई को डिस्काउंट आदि ऑफर दिए जा रहे हैं। एक बड़े बिल्डर ने तो रियल इस्टेट एजेंटो के लिए मुंबई-गोवा इंटरनेशनल क्रूज ट्रिप भी दिया। सिडको द्वारा बनाए गए किफायती घरों को भी लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिला था लेकिन कुल बनाए गए घरों में से भी १,१०० घर लॉटरी में नहीं बिक पाए। नतीजतन अब सिडको को फिर लॉटरी निकालनी पड़ेगी। आनेवाले दिनों में नई मुंबई में एयरपोर्ट, मेट्रो आदि सुविधाएं भी उपलब्ध होनेवाली हैं। ऐसे में लोग महामुंबई का रुख कर रहे हैं लेकिन फ्लैटों के आसमान छूते दामों के कारण लोग अपना मन मारकर बैठ रहे हैं।