बजाते रहो! रेडियो पर होगी ‘मीटू’ की बात

‘मीटू’ अभियान ने देश में भूचाल ला दिया है। नेता, मंत्री, संत्री, मीडिया, बॉलीवुड हर जगह हलचल मची हुई है कि पता नहीं कब किसका नंबर लग जाए। हालांकि केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने उन पर आरोप लगानेवाली महिला पत्रकार के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दर्ज करा दिया है बावजूद इसके ‘मीटू’ मुहिम चलानेवाली महिलाओं के जोश में कोई कमी आती नहीं दिख रही। आलम यह है कि अब इस ‘मीटू’ अभियान को सोशल मीडिया से बाहर निकालकर रेडियो पर लाने का अभियान चलाया जा रहा है ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।  इसके लिए कुछ महिलाओं ने हस्ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है।
‘मीटू’  अभियान को सोशल मीडिया तक सीमित न रख एफएम रेडियो पर भी इसकी बात करने की मांग हो रही है। इस मांग को अमली जामा पहनाने के लिए पिटीशन चलाया जा रहा है। रेडियो पर इस अभियान को चलाने की वजह महिलाएं उन वर्गों को इस अभियान में जोड़ना चाहती हैं जो सोशल मीडिया से अछूते रहे हैं। महिलाओं का मानना है कि सोशल मीडिया से दूर रहनेवाली महिलाएं अत्याचार की शिकार हुई हैं। एफएम रेडियो पर इस अभियान के आने से वे भी अपने अत्याचार की व्यथा ‘मीटू’ के माध्यम से जाहिर कर सकेंगी।
रेडियो भी बोलेगा ‘मीटू’!
‘मीटू’ अभियान इन दिनों देश में छाया हुआ है। इसके जरिए महिलाएं अपने ऊपर हुए यौन अत्याचार की कहानी बयां कर रही हैं। इस अभियान ने बॉलीवुड से लेकर राजनीति व पत्रकारिता क्षेत्र में हड़कंप मचा रखा है। ट्विटर, फेसबुक पर अभियान के माध्यम से हर क्षेत्र की महिलाएं जीवन में अपने साथ हुए शारीरिक शोषण का दर्द बयां कर शोषणकर्ताओं का नाम उजागर कर रही हैं। इस अभियान को सोशल मीडिया से रेडियो पर विस्तार करने की मुहिम चलाई जा रही है। इसके लिए बाकायदा पिटीशन चलाकर लोगों का समर्थन मांगा जा रहा है। ‘चेंज.ओरआरजी’ के माध्यम से अर्चना द्विवेदी नामक महिला ने उक्त पिटीशन चलाया है। इस पिटीशन के तहत मांग की गई है कि ९३.५ रेड एफएम पर शाम के समय हर सप्ताह ‘मीटू’ का विशेष प्रसारण किया जाए।
अर्चना का मानना है कि रेड एफएम पर उक्त अभियान का डंका बजने से वे महिलाएं जुड़ेंगी जो सोशल मीडिया से पूरी तरह अछूती हैं और मध्यमवर्गीय हैं। इस मांग का समर्थन अन्य महिलाओं ने भी किया है। बोहरा समाज में महिला खतना की प्रथा के खिलाफ लड़ाई लड़ रही तसलीमा ने इस पिटीशन का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि आज हर वर्ग की महिलाएं कहीं न कहीं अत्याचार का शिकार हो रही हैं। रेडियो पर ‘मीटू’ का विशेष प्रसारण होने से मध्यम व अन्य वर्ग की महिलाएं भी अपने ऊपर हुए अत्याचार का दर्द बताने का साहस करेंगी। एक मार्वेâटिंग कंपनी में काम करनेवाली नीलिमा शुक्ला ने बताया कि सिर्फ रेडियो ही नहीं बल्कि उन तमाम माध्यमों का इस्तेमाल ‘मीटू’ मुहिम के लिए व्यापक स्तर पर किया जाना चाहिए ताकि उन नराधमों की कहानी बाहर आ सके और उनमें महिलाओं के प्रति आदर-सम्मान का निर्माण हो। गरिमा संस्था की अध्यक्ष यास्मीन शेख ने भी इसका समर्थन किया है। यास्मीन ने उन सभी माध्यमों पर ‘मीटू’ अभियान का प्रसारण करने का जोर दिया है ताकि ज्यादा से ज्यादा महिला इस अभियान के माध्यम से अपने ऊपर हुए शारीरिक शोषण का दर्द बताने की हिम्मत कर सकेंगी जिससे महिलाओं पर होनेवाली अत्याचार की घटनाएं रोकी जा सकें। सामाजिक कार्यकर्ता प्रिया पाटील ने भी रेडियो पर ‘मीटू’ मुहिम चलाए जाने का समर्थन किया है। इनका मानना है कि कहीं न कहीं हर वर्ग की महिलाएं शोषण की शिकार हो चुकी हैं। इस मुहिम से उनमें नराधमों के खिलाफ आवाज उठाने का साहस मिलेगा