बढ़ा सांपों का वार, दवाई बेकार

सांपों के काटने की अनेक घटनाएं सामने आती रहती हैं। अक्सर ऐसा पाया गया है कि अस्पतालों में एंटी वेनम (सांप काटने की दवा) उपलब्ध न होने के कारण लोगों की मौत हो जाती है। इन दिनों एक और चौंकानेवाला तथ्य सामने आया है। सांप तो जहरीले होते ही हैं लेकिन एंटी वेनम बनानेवाली हाफकीन बायो फर्मा के मुताबिक सांप पहले से अधिक जहरीले हो गए हैं, इस कारण सर्पदंश को काटने के लिए दिया जानेवाला एंटी वेनम डोज कमजोर(बेकार) हो गया है। ऐसे में विषैले सांप के दंशवाले मरीजों को अब एंटी वेनम के ज्यादा डोज की जरूरत पड़ रही है।
गत वर्ष मुंबई में सर्पदंश के १३३ मामले सामने आए थे जबकि राज्य में गत वर्ष ३३ हजार ६७३ लोगों को सांप ने डसा था। सांप काटने के बाद किसी व्यक्ति की जान बचाने का एकमात्र उपाय है एंटी वेनम लेकिन कई कंपनियों ने एंटी वेनम बनाना ही छोड़ दिया है। हिंदुस्थान में गिनी-चुनी निजी कंपनियां हैं, जो सांपों के जहर का तोड़ बनाती हैं। हाफकीन बायो फर्मा भी एक संस्था है, जो एंटी वेनम बनाती है लेकिन अब उनके समक्ष एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। हाफकीन ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर की निदेशक निशीगंधा नाईक ने बताया ‘पहले सांप के डसने पर मरीज एंटी वेनम के २ से ३ वायल (डोज) में ठीक हो जाता था लेकिन अब एंटी वेनम इतने कमजोर हो गए हैं कि एक मरीज को ठीक करने में २० से २५ वायल भी लग जाते हैं। इतना ही नहीं, मरीजों में एंटी वेनम का एलर्जिक रिएक्शन भी देखा गया है।’ एंटी वेनम भी सर्प से लिए गए जहर से ही बनाया जाता है लेकिन अलग-अलग क्षेत्र, सीजन और पर्यावरण में हो रहे बदलाव के कारण यह समस्या आ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर वर्ष हिंदुस्थान में २ से ३ लाख लोग सर्पदंश के शिकार होते हैं, जिसमें से ५० हजार लोगों की मौत हो जाती है। सांप काटने की कुल घटनाओं में से केवल १० प्रतिशत ही रिपोर्ट की जाती है। ऐसे में अब हम और भी प्रभावशाली एंटी वेनम बनाने पर काम कर रहे हैं।