" /> बदल गया रोमांस

बदल गया रोमांस

एक दिन में २८ गाने गाकर ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज करवानेवाले गायक कुमार शानू कोलकाता के हैं। दुनिया में कई गायक और गायिकाएं हैं जो अपना पेट पालने के लिए होटलों में गाते हैं पर सबकी किस्मत कुमार शानू जैसी नहीं होती। प्लेबैक सिंगर बनने से पहले शानू भी होटलों में सिंगर थे। २००९ में उन्हें ‘पद्मश्री’ की उपाधि मिली। फिल्म ‘आशिकी’ के गीतों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया और वे एक के बाद एक सफलता की सीढ़ी चढ़ते चले गए। इन दिनों वे ‘जी टीवी’ पर ‘सारेगामापा लिटिल चैंप्स’ के जज बने हैं। पेश है कुमार शानू से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

आप इस शो को करने के लिए कैसे राजी हुए?
अपने देश में संगीत का बहुत बड़ा खजाना है। बच्चों में ढेर सारी प्रतिभाएं छिपी हैं। इनकी प्रतिभा को ‘जी टीवी’ ने अगर ‘सारेगामापा लिटल चैंप्स’ जैसा प्लेटफार्म दिया और मुझे इस शो का जज बनने का अवसर दे रहे हैं तो ये मेरा सम्मान है।

जज करते समय आप किन बातों का खयाल रखेंगे?
कुछ बच्चे जन्म से ही प्रतिभावान होते हैं, तो कुछ बच्चे सीखकर अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाते हैं। दोनों को समझना मुश्किल नहीं। मेरे ‘न’ कहने के बाद बच्चे आहत न हों इसके लिए मैं उन्हें पूरी बात एक्सप्लेन करूंगा। हम माता-पिता को समझाएंगे कि बच्चों में अगर संगीत नहीं है, तो उसे बच्चों पर थोपे नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें उस दिशा में निर्देश दें।

रियलिटी शो के बाद बच्चे कहीं दिखते नहीं?
इसमें बच्चों की प्रतिभा और उनके माता-पिता की जिम्मेदारी होती है कि मंच से निकलने के बाद वे बच्चे की जिंदगी को वैâसे निखारें। कुछ बच्चों के माता-पिता उन्हें लेकर पैसा कमाने की सोचते हैं। माता-पिता का ध्यान बच्चे के फ्यूचर की बजाय पैसों पर होता है।

फिल्मों में मेलोडी कम होने की क्या वजह है?
सुरीले गाने आज भी बन रहे हैं लेकिन पहले की तुलना में वे कम जरूर हो गए हैं। आज अच्छे संगीत बनानेवाले संगीतकारों की संख्या कम हो चुकी है। आज एडॉप्शनवाले संगीतकार हैं, क्योंकि किसी गाने को क्रिएट करने में ढेर सारा समय और डेडिकेशन की जरूरत होती है। उसे हम मिस करते हैं। मेलोडी पहले की तुलना में गायब नहीं बल्कि कम हो गई है। आजकल रोमांस के तरीके बदल गए हैं। रोमांस अब बोल्ड हुआ है इसलिए गाने भी अलग हो गए हैं। पहले रोमांस सॉफ्ट तरीके से होता था। भिन्न शहरों में रहते हुए भी हीरो-हीरोइन सैड गाना गाते थे।

क्या आप किसी संगीतकार को मिस करते हैं?
अवश्य मिस करता हूं। पंचम दा यानी आर.डी. बर्मन के जाने के बाद म्यूजिक इंडस्ट्री खत्म हो गई। इसके अलावा गुलशन कुमार की मृत्यु और नदीम-श्रवण का अलग हो जाने ने भी संगीत की दुनिया को डुबो दिया। काम अब भी कर रहा हूं लेकिन ऐसा लगता है जैसे संगीत कहीं खो गया है।

क्या आपके गाए गीतों को भी फिल्मों से निकाला गया?
ये कोई नई बात नहीं है, क्योंकि पहले गाने को गवा लेते हैं और बाद में फिट न होने पर उसे निकाल देते हैं। ऐसे हजारों गाने हैं जिनका उपयोग नहीं हुआ। गुलशन कुमार का एक म्यूजिक बैंक हुआ करता था, जिसमें पंचम दा के संगीत में मेरे गाए ४० गाने पड़े हुए हैं। गुलशन कुमार की मृत्यु से म्यूजिक इंडस्ट्री को बहुत बड़ा लॉस हुआ है।

रिमिक्स का दौर कैसा लगता है?
ये नए जेनरेशन की मांग है और मेरे मना करने से ये दौर खत्म नहीं होगा।

आपकी फिटनेस का राज क्या है?
मेरा मन जो व्यक्तित्व का आईना है। अगर वो साफ है तो आप हमेशा फिट रहेंगे।

कुमार शानू
जन्म तारीख – २० अक्टूबर, जन्म स्थान – कोलकाता
कद – ५ फुट ११ इंच, वजन – ७५ किलोग्राम
प्रिय परिधान – धोती-कुर्ता, जींस, टी-शर्ट, जैकेट, थ्री पीस सूट
मनपसंद व्यंजन – बैदा करी, मटन, चावल, फिश करी, प्रâाई फिश
पसंदीदा डेजर्ट – रसगुल्ला, संदेश
मनपसंद सिंगर्स – लता दीदी, आशा भोसले और किशोर कुमार
पसंदीदा संगीतकार – आर.डी. बर्मन
प्रिय टूरिस्ट प्लेस – दार्जिलिंग, सिक्किम, कनाडा