बनारस, कोलकाता से छपरा तक फैला था ठगों का जाल, रेलवे में नौकरी के नाम पर ठगी

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रेलवे में नौकरी का झांसा देकर बेरोजगारों को ठगनेवाले ३ ठगों को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच की यूनिट- ११ ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों में एक महिला भी शामिल है। आरोपियों ने देशभर के १०० से ज्यादा बेरोजगारों को रेलवे में नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपए का चूना लगाया था। मुंबई के साकीनाका तथा बिहार के विभिन्न पुलिस थानों में आरोपियों के खिलाफ मामले दर्ज थे।
बता दें कि गोरेगांव निवासी युवक को रेलवे में नौकरी लगाने का झांसा देकर ठगों ने सात लाख रुपये ऐंठ लिए थे। ठगों ने पीड़ित युवक को नकली पहचान पत्र देकर ट्रेनिंग के बहाने बिहार के छपरा भेजा था। वहां पीड़ित को महीनेभर किसी काम के बिना ही बैठा कर रखने के बाद जल्द ही नई पोस्टिंग के आश्वासन के साथ वापस मुंबई भेज दिया गया। महीनेभर इंतजार के बाद जब पीड़ित युवक ने नई पोस्टिंग के बारे में जानकारी के लिए फोन पर संपर्क किया तो ठग उसे वरगलाने का प्रयास करने लगे। ठगे जाने का संदेह होने पर पीड़ित ने जांच की तो ठगी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश हो गया। यूनिट- ११ के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चिमाजी आढाव, पीआई आनंद रावराणे, रईस शेख, एपीआई शरद झिने व नितीन उतेकर की टीम ने मामले की जांच की तथा राजेशकुमार अशोक तांती, मनीष िंसह वीरेंद्र िंसह ऊर्फ सरोजकुमार उदयभान राय को वाराणसी से तथा अंधेरी में रहनेवाली उनकी ३० वर्षीय महिला सहयोगी को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि राजेश का गोरेगांव में प्रोडक्शन हाउस था। वहीं उसकी मुलाकात ठग महिला से हुई थी और उक्त महिला के जरिए राजेश, मनीष से मिला था। मनीष खुद को रेलवे में सीपीओ (चीफ पर्सनल ऑफिसर) बताता था। महिला के जरिए वह रेलवे में नौकरी का फर्जीवाड़ा कर रहा था। इस काम के बदले महिला को ३० प्रतिशत कमीशन मिलता था। मनीष और उसके साथी बेरोजगार युवकों को पहले वाराणसी बुलाते थे बाद में प्रशिक्षण के बहाने उन्हें २०-२० के समूह में कोलकाता भेजते थे। इस टोली ने वहां एक बैरक किराए पर ले रखा था। कोलकाता में रेलवे मुख्यालय के पास स्थित एक अस्पताल में उम्मीदवारों की मेडिकल जांच होती थी। वहां के डॉक्टर उम्मीदवारों को फिटनेस प्रमाणपत्र देते थे। मेडिकल के बाद १५ दिनों में उम्मीदवारों को फिर बुलाया जाता था तथा उन्हें तीन महीने तक प्रशिक्षण दिया जाता था। प्रशिक्षण के बाद उम्मीदवारों को फर्जी नियुक्तिपत्र दिया जाता था तथा जाली सर्विस शीट तैयार की जाती थी और उम्मीदवारों को बिहार के छपरा रेलवे स्टेशन पर सुबह ११ से ५ के बीच तैनात किया जाता था। वहां ठग उम्मीदवारों को किसी से बात न करने का निर्देश देते थे अन्यथा नौकरी गंवाने की चेतावनी दे रखी थी। उम्मीदवारों को विश्वास दिलाने के लिए ठगों ने उनके बैंक खाते में १५ हजार रुपए भी जमा कराए थे।