बनेगा भगवान राम का अद्भुत मंदिर : सुप्रीम कोर्ट का सुप्रीम फैसला

आज का दिन भारतीय जनमानस में एक अहम दिन के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। अयोध्या के श्रीराम मंदिर मामले पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का देश के सभी वर्गों ने स्वागत किया है। सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए देश की सर्वोच्च न्यायालय ने एक संतुलित फैसला दिया है। आज का फैसला सही मायने में सत्य की विजय माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा ही परिपक्व फैसला दिया है, जो विशुद्ध प्रमाणों के आधार पर निर्धारित है।
आज के फैसले में न किसी पक्ष की जीत है, न ही किसी पक्ष की हार है। आज के इस फैसले से देश में खुशी की लहर दौड़ गई है। मुस्लिम समुदाय के अधिकतर पक्षकारों ने इस फैसले को सब की जीत माना है। सिर्फ सुन्नी वक्फ बोर्ड के एडवोकेट जफरयाब जिलानी ने इस फैसले पर अपना असंतोष व्यक्त किया है और उन्होंने कहा कि वे कोर्ट के इस फैसले का समुचित अध्ययन करने के बाद, आगे अपील में जाने का तय करेंगे किंतु उन्होंने यह भी कहा कि इस फैसले पर अभी किसी को भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए एवं देश में शांति एवं सौहार्द का वातावरण बना रहना चाहिए। यह पूरा फैसला १०४५ पन्नों में दर्ज किया गया है, जिसमें से ९२९ पन्ने पर सभी पांचों जजों के हस्ताक्षर हैं। सिर्फ ११६ पन्ने पर एक जज ने अपना अलग निष्कर्ष निकाला है जो कि संलग्न प्रतिलिपि के रूप में फैसले में जोड़ा गया है। एक तरह से पूरा फैसला बहुमत से किया गया। मुख्य न्यायाधीश ने पूरे फैसले को आधे घंटे में बड़ी शांति से पढ़ा और लोगों में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इस बात का पूरा ध्यान रखा। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सभी बातें हमने प्रमाणों के आधार पर तय की है। किसी भी जमीन का टाइटल आस्था के आधार पर नहीं दिया जाता है। यह देश के संविधान की बहुत बड़ी जीत है। कोई भी पक्षपात किसी भी पक्ष से नहीं किया गया। हाई कोर्ट के फैसला के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय देते हुए कहा कि वह निर्णय तार्किक नहीं था।