बम है!, हॉक्स से हलाकान पुलिस

‘वहां बम रखा है!’ पुलिस कंट्रोल में जब ये खबर आती है तो पूरा महकमा सतर्क होकर बम की खोज में जुट जाता है। डॉग स्क्वॉड, बम निरोधक दस्ता, पुलिस बल आदि सब अपने काम पर लग जाते हैं और जब स्टेशन परिसर या फिर ट्रेन की जांच की जाती है तो मामला टांय-टांय फिस्स् साबित होता है। देश की रेलवे, एयरपोर्ट में इन दिनों यही देखने को मिल रहा है। जब से मुंबई में २६/११ का आतंकी हमला हुआ है तब से आज तक पुलिस कंट्रोल रूम को कई बार बम के फोन आ चुके हैं लेकिन जब जांच की जाती है तो वह कॉल हॉक्स कॉल (फर्जी कॉल) साबित होता है। इन हॉक्स कॉल्स से अब पुलिस भी हलाकान हो चुकी है लेकिन रेलवे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बात बम की हो तो पुलिस हमेशा तत्पर और सतर्क ही रहती है।
रेलवे के पुलिस और इंटेलीजेंस अधिकारियों का कहना है कि पहले हॉक्स कॉल ४-६ महीने में एक बार आते थे लेकिन जब से श्रीलंका के चर्च में धमाके हुए हैं तब से हॉक्स कॉल के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। अधिकारी का कहना है कि महीने में चार-पांच बम होने की खबर हमें रेलवे कंट्रोल रूम या फिर शहर पुलिस कंट्रोल रूम से मिलती है लेकिन जब जांच की जाती है तो मामला ‘हॉक्स कॉल’ का साबित होता है। इंटेलीजेंस के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार शरारती तत्व बम होने की सूचना देकर सिस्टम को परेशान करने की कोशिश करते हैं। ऐसा कई बार जांच में सामने आ चुका है। अधिकारी का कहना है कि इससे पहले स्टेशन और ट्रेनों में बम होने की सूचना मिल चुकी है। जब जांच की गई तो कॉल गलत पाया गया। कई बार शरारत करने के लिए मानसिक रूप से कमजोर लोगों ने भी बम होने का कॉल कंट्रोल रूम को किया है। जब कॉल करने वाले का पता निकाला गया तो पता चला कि कॉल करनेवाला पागल किस्म का है। अधिकारी ने बताया कि कॉल कितने भी आए हम हमेशा २४ घंटे सतर्क ही रहते हैं।