" /> बयान से नुकसान

बयान से नुकसान

गलवान घाटी में हुए संघर्ष पर देश के पूर्व सैन्य अधिकारियों की राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम भेजी गई एक चिट्ठी ने सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कोलकाता से प्रकाशित एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार यह चिट्ठी पूर्व नौसेना अध्यक्ष एडमिरल एल. रामदास ने लिखी है, जिसका १४३ पूर्व सैन्य अधिकारियों ने समर्थन किया है। इस चिट्ठी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सीडीएस जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों को भी संबोधित किया गया है। इस चिट्ठी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से चीन द्वारा की गई घुसपैठ के बारे में जवाब देने की मांग की गई है। इस चिट्ठी में मोदी के उस बयान का भी खास तौर पर उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने भारतीय सीमा में किसी भी घुसपैठ की बात से इंकार किया था। चिट्टी में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के बयान का बीजिंग ने उल्लेख करते हुए पूरी गलवान घाटी पर अपना दावा पेश कर दिया था। पूर्व सैन्य अधिकारियों का कहना है कि अस्पष्ट, मौखिक और विरोधाभासी बयान का चीन ने फायदा उठाया। हालांकि बाद में प्रधानमंत्री कार्यालय ने सफाई दी थी कि मोदी का बयान गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद की स्थिति को लेकर था। चिट्ठी में पूर्व सैन्य अधिकारियों ने मांग की है कि राजनैतिक नेतृत्व और राष्ट्रपति तथ्यों की जांच के लिए एक समिति बनाएं, जो लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ, जमीन कब्जाने की जांच करे और एक तय समय में अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करे। इसके साथ ही चिट्ठी में १५ जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के लिए राजनैतिक, सामाजिक और सैन्य स्तर की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया गया है।
गजब की पारदर्शिता….!
यह अलग बात है कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता का व्यापक प्रचार-प्रसार करने में देश के सत्ता प्रतिष्ठान का कोई सानी नहीं है। लेकिन पारदर्शिता, ईमानदारी, जनता को जवाब देने जैसी सारी बातें तब दम तोड़ देती हैं जब कोई भी सवाल पीएम केयर्स फंड से संबंधित हो। यही कारण है कि अब इस फंड को संसद की लोक लेखा समिति की जांच के दायरे से भी बाहर कर दिया गया है। विडंबना यह है कि जो समिति कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की ओर से पेश रिपोर्टों की जांच-पड़ताल करती है। जो समिति २जी स्पेक्ट्रम जैसे अहम मामले की जांच कर चुकी है, वह पीएम केयर्स फंड की जांच नहीं कर सकती। इस मसले पर समिति के अध्यक्ष व लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने सदस्यों से देश के बारे में सोचने और अपनी अंतरात्मा से काम करने और इस महत्वपूर्ण विषय पर आम सहमति बनाने की अपील की थी। समिति की बैठक में शामिल भाजपा सदस्यों ने कोरोना संकट के सरकारी प्रबंधन के जांच-पड़ताल के अधीर रंजन चौधरी के प्रस्ताव को साफ तौर पर रोक दिया। बैठक में समिति में शामिल भाजपा के सभी सदस्य मौजूद थे। बैठक में बीजू जनता दल के नेता भर्तृहरि महतानी से भाजपा को सबसे ज्यादा समर्थन मिला है। प्रस्ताव के समर्थन में द्रमुक नेता टीआर बालू उन कुछ लोगों में से थे, जिन्होंने विपक्ष के प्रस्ताव का समर्थन किया। विपक्ष का दावा है कि कोरोना महामारी और उससे निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जांच से केंद्र सरकार इसलिए बचना चाहती है कि इससे पीएम केयर्स फंड पर करीब से नजर रखी जा सकती है। पीएम केयर्स फंड कैग के अधीन नहीं आता है। सवाल यह है की सरकार इस फंड से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने से क्यों कतरा रही है? संसदीय समिति की बैठक में भाजपा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव ने पीएम केयर्स फंड की जांच के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि पीएम केयर्स की फंडिंग संसद द्वारा स्वीकृत नहीं है और इस वजह से लोक लेखा समिति इस मामले की जांच नहीं कर सकती है।
स्मार्ट हेल्मेट!
कोरोना संक्रमण रोकथाम का पहला चरण सुरक्षित स्थान पर रहना और पर्याप्त दूरी बनाकर चलना-फिरना है। शरीर के तापमान की जांच कोरोना संक्रमित व्यक्ति की पहचान करने में एक अन्य कारगर उपाय है। सुरक्षित दूरी रखकर किसी भी व्यक्ति के शरीर का तापमान पता करने के लिए थर्मल स्क्रीनिंग भी एक माध्यम है, जिसमें एक मिनट में अधिकतम १०० लोगों का तापमान चेक किया जा सकता है। अब इस कड़ी में एक ऐसा हेल्मेट उपलब्ध है जिसे पहनकर एक मिनट में २०० लोगों के शरीर का तापमान पता किया जा सकता है। इस स्मार्ट हेल्मेट में थर्मल स्कैनर लगा हुआ है, जो मोबाइल से जुड़ा है। पुणे की एक स्वयंसेवी संस्था भारतीय जैन संगठन ने ये स्मार्ट हेल्मेट थर्मल स्कैनर कोरोना योद्धाओं को उपलब्ध कराए हैं। इसकी मदद से एक मिनट में २०० लोगों की स्कैनिंग की जा सकती है। कोरोना के चलते हुई तालाबंदी में यह संस्था पूरे महाराष्ट्र में करीब १५ लाख लोगों की जांच कर चुकी है और उनमें से १० हजार कोरोना संक्रमितों को सरकारी अस्पतालों तक पहुंचा चुकी है। संस्था का दावा है कि एक लाख की भीड़ में भी इस हेल्मेट के माध्यम से एक मिनट में २०० लोगों के तापमान की रिपोर्ट उनकी फोटो सहित मोबाइल में संग्रहित कर डाटा विश्लेषण के बाद संदिग्ध संक्रमितों की पहचान आसानी से की जा सकती है। इसके अंदर मौजूद कैमरा और थर्मल स्कैनर शरीर के उतार-चढ़ाव को बता देता है। दुबई में इसका प्रयोग सबसे पहले किया गया था। दिल्ली पुलिस देश में बने स्मार्ट हेल्मेट थर्मल स्कैनर का प्रयोग कर रही है। यह हेल्मेट अपने चारों तरफ नजर आनेवाली परिधि में मौजूद लोगों का चेहरा देख लेता है और साथ ही सात मीटर की दूरी में मौजूद शख्स का तापमान बता देता है।
बैंक की फर्जी शाखा
अब तक जाली नोट, फर्जी चेक आदि के माध्यम से आर्थिक घोटाले सामने आते रहे हैं लेकिन रिजर्व बैंक के बाद देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक की नकली शाखा खुल जाए तो फर्जीवाड़े करनेवालों के दिमाग की दाद देनी होगी। भला हो लॉकडाउन का अन्यथा यह कथित नई बैंक शाखा खोलने वाले ठग लोगों को तगड़ा चूना लगाकर चंपत हो जाते। एक अंग्रेजी वाणिज्य दैनिक की खबर के अनुसार तमिलनाडु के कुडडूर जिले के पानरेटी में एक बैंक की फर्जी शाखा चलाने के लिए पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। तीन लोगों में से एक आरोपी के माता-पिता पूर्व बैंक कर्मचारी थे। पानरेटी में पुलिस निरीक्षक अम्बेथकर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस ने एक बेरोजगार युवक, जिसके माता-पिता पूर्व बैंक कर्मचारी थे, सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले के मास्टरमाइंड कमलबाबू के पिता का १० साल पहले निधन हो गया था, जबकि उसकी मां दो साल पहले एक बैंक से सेवानिवृत्त हुई थीं। गिरफ्तार किए गए अन्य दो लोगों में एक व्यक्ति प्रिंटिंग प्रेस चलाता है जहां से सभी रसीदें, चालान और अन्य दस्तावेज छापे गए थे जबकि दूसरा साथी रबर स्टांप बनाता था। यह फर्जी शाखा तीन महीने पहले अस्तित्व में आई थी। मामला तब खुला जब बैंक के एक ग्राहक ने इस शाखा को देखा तब शहर की मुख्य शाखा प्रबंधक को बताया। इसके तुरंत बाद, यह मामला जोनल कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसने शाखा प्रबंधक को सूचित किया कि पारनेटी में बैंक की सिर्फ दो शाखाएं ही चल रही हैं। हाल-फिलहाल में और कोई तीसरी शाखा नहीं खोली गई थी। बैंक अधिकारियों ने उस जगह का दौरा किया और वे हैरान रह गए जब उन्होंने पूरे सेट को देखा, जो बिल्कुल बैंक शाखा की तरह था, जिसमें बैंक की सभी प्रणाली और बुनियादी ढांचा मौजूद था। शुक्र है कि इस नकली बैंक शाखा से कोई लेन-देन नहीं हुआ, इसलिए किसी का पैसा नहीं डूबा। तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है।