बहाल होते ही गुल हो गए सीबीआई चीफ वर्मा

सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाल होने के अगले दिन सीबीआई चीफ अलोक वर्मा अपने पद से गुल हो गए। उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय सिलेक्ट कमिटी ने कल पद से हटा दिया। कमिटी के अन्य सदस्यों में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस एके सीकरी शामिल थे। जस्टिस सीकरी देश के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की तरफ से उपस्थित हुए। यह अहम बैठक दो घंटे से अधिक समय तक चली और आखिरकार आलोक वर्मा पर ही गाज गिरी। वर्मा ३१ जनवरी को रिटायर हो रहे हैं।
सिलेक्शन कमिटी ने २-१ से यह पैâसला लिया। मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस पैâसले का विरोध किया। सूत्रों के मुताबिक जस्टिस सीकरी ने कहा कि आलोक वर्मा के खिलाफ जांच की जरूरत है। गौर करनेवाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ही आलोक वर्मा को उनके पद पर बहाल कर दिया था। वर्मा १९७९ बैच के आईपीएस अफसर हैं। सीबीआई के इतिहास में पहली बार है जब एजेंसी चीफ के खिलाफ इस तरह का एक्शन हुआ है। सीवीसी रिपोर्ट में वर्मा पर ८ आरोप लगाए गए थे, जिसे कमिटी के समक्ष रखा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक आलोक वर्मा को फायर सेफ्टी विभाग का डीजी बनाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि भ्रष्टाचार और अपने कर्त्तव्यों की उपेक्षा करने के आरोप में सीबीआई डायरेक्टर वर्मा को हटाया गया। कुछ अधिकारियों ने कहा है कि वर्मा को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पोस्टिंग दी जा सकती है।