बाइक की होगी बोलती बंद!

तेल से चलनेवाली बाइक के सवार अब अपनी गाड़ियों के चक्का जाम के लिए तैयार हो जाएं क्योंकि सड़क पर दाएं-बाएं कर्कश ध्वनि और बूम-बूम की आवाज करके दौड़नेवाली बाइक की अब बोलती बंद होनेवाली है। केंद्र सरकार ग्रीन एनर्जी पर आधारित गाड़ियों को बढ़ावा देने की योजना पर कार्य कर रही है जिसके तहत सड़क पर बैटरी से चलनेवाली दोपहिया और तीन पहिया वाहन नजर आएंगे। नीति आयोग ने इसके लिए समय सीमा भी तय कर दी है, जिसके बाद शहर की सड़क पर फर्राटा से ये बाइक्स् दौड़ेंगी और बूम-बूम का शोर बंद हो जाएगा।
पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, बढ़ता प्रदूषण और खत्म होते तेल भंडार ने वैकल्पिक इंधन की खोज करने को मजबूर कर दिया है। इसके लिए ग्रीन एनर्जी यानी बिजली से चलनेवाले वाहनों पर काम तेज हो गया है।
जल्द ही सड़कों पर बैटरी से चलनेवाले बाइक व स्कूटी हौले-हौले दौड़ते दिखेंगे। इनका परिचालन सस्ता भी होगा और ये शोर भी कम करेंगे। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय बिजली आधारित वाहनों के परिचालन को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रहा है। इसके लिए वह बिजली से चलनेवाले वाहनों पर भारी छूट (सब्सिडी), लाइसेंस प्रणाली में रियायत, परमिट सिस्टम से मुक्ति, ऑपरेटरों और एग्रीगेटरों के लिए बिजली आधारित वाहनों को बेड़े में शामिल करने में अनिवार्यता आदि शामिल है।
इसके अनुरूप नीति आयोग ने भी समय सीमा निश्चित की है, जिसमें २०२५ तक बाइक और २०२३ तक १५५ सीसी से कम क्षमतावाले तिपहिया वाहनों पर प्रतिबंध लागू करने का निर्णय है। देश में वित्त वर्ष २०१९ में करीब ७ लाख वाहन बिके हैं जबकि देश में २०१७-१८ तक करीब २ करोड़ बाइक (दो पहिया वाहन) सड़क पर थे। यदि इसकी तुलना २०१०-११ से की जाए तो उस साल करीब ११.७७ मिलियन दोपहिया वाहन थे, जिनमें बहुत ही तेजी से बढ़ोतरी हुई है। दूसरी तरफ तिपहिया वाहन साल दर साल तेजी से बढ़ रहे हैं।
नीति आयोग ने दी समय सीमा
नीति आयोग और दोपहिया -तिपहिया गाड़ी निर्माताओं के साथ बैठक भी हुई, जिसमें वाहन उद्योग को बिजली से चलनेवाले वाहनों के निर्माण के विषय में २ सप्ताह में अपनी योजना सौंपने का समय दिया है। हालांकि बजाज ऑटो और टीवीएस ने पेट्रोल और डीजल आधारित गाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय का विरोध किया है। इन कंपनियों ने ई-वाहन पर योजना पेश करने के लिए ४ महीने का समय मांगा है।
पेट्रोल-डीजल की खपत कम करना है
देश के इंधन की जरूरत का ८३.७ प्रतिशत आयात होता है, जो करीब २११.६ मिलियन टन है। इस आयात पर २०१८-१९ में हिंदुस्थान ने १११.९ बिलियन डॉलर खर्च किया है। अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे इस बोझ को कम करने के लिए ही केंद्र सरकार ग्रीन एलर्जी से चलनेवाले वाहनों के निर्माण और परिचालन को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है।