बाइस्कोप: छोड़ो कल की बातें

जब मेरे कानों में मन्ना डे द्वारा गाए गए गीत ‘ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन, तुझ पे दिल कुर्बान, तू ही मेरी आरजू, तू ही मेरी आबरू, तू ही मेरी जान। सुनाई पड़ता है तो एक बार उस गीतकार का चेहरा सामने आ जाता है। नए कल की चुनौतियों से लोहा लेने, राष्ट्र गौरव का भाव रखनेवाले, प्रगतिशील लेखक ,गीतकार, संगीतकार, नृत्यकार, अभिनेता प्रेम धवन जब अलग-अलग लाइनों को पिरोकर गीत लिखते थे तो उनके गीतों पर लोग अनायास ही थिरकने लगते। उनके देशभक्ति के गीतों से हर एक हिंंदुस्थानी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है और देश पर मर मिटने का दिल करने लगता है। १५ अगस्त को देश की आजादी पर जब उन्होंने लिखा ‘झूम-झूम के नाचों आज, नाचो आज, गाओ खुशी के गीत हो, गाओ खुशी के गीत। आज किसी की हार हुई है आज किसी की जीत।’
प्रेम धवन का जन्म १३ जून १९२३ को अंबाला में हुआ था। उनके पिता अंग्रेजों के जमाने के जेलर थे। सरकारी नौकरी होने से उनका हमेशा तबादला होता रहता था। उनकी जहां-जहां बदली होती, प्रेम धवन वहां के रहन-सहन से वाकिफ होते गए। लाहौर से पढ़ाई की। वे वामपंथी विचारधारा के थे। जब देश में आजादी की लहर चली तो वे उसमें कूद पड़े। वे एक लोकधर्मी, लोकप्रेमी लेखक थे। आजादी की बात के साथ-साथ आजादी की बात की याद लिखनेवाले जब प्रेम धवन ने लिखा कि ‘जागा हिंदुस्थान जमाना बदल रहा, उठा है तूफान जमाना बदल रहा। उस गीत ने देश के नौजवानों में एक नया जोश भर दिया। उसके बाद उन्होंने लिखा ऐ वतन, ऐ वतन, मुझको तेरी कसम, तेरी राहों में जीवन गवां देंगे हम। देश की सीमा पर देश की सुरक्षा कर रहे जवान जब इस गीत को सुनते हैं तो उनमें रोमांच भर जाता है। प्रेम धवन के बारे में फिल्म अभिनेता, निर्माता, निर्देशक मनोज कुमार कहते हैं कि जब हमने अपनी फिल्म ‘शहीद’ के लिए गीत लिखने एवं संगीत देने की बात कही तो कुछ लोगों ने इस पर एतराज जताया लेकिन इस फिल्म का गीत ‘मेरा रंग दे बसंती चोला’ लोगों को बहुत पसंद आया। वे इंसानियत और देश के प्रति समर्पित थे। जिज्ञासा से भरपूर थे। वे शाने वतन थे। उनकी रचनाओं की चमक कभी धुंधली नहीं होगी। आज हम चंद्रयान भेज कर चंद्रमा पर पहुंच रहे हैं लेकिन उन्होंने चांद पर भी कई गीत लिखे। चंदामामा दूर के पुए पकाए गुर के तथा चंदा भी देखा तारा भी देखा, देखा सूरज वर्षों’। उनके लिखे गीत ‘गंगा आए कहां से गंगा जाए कहां रे’। जहां गंगा की महिमा का वर्णन होता है, वहीं प्रेम करनेवालों के लिए लिखा कि ‘मुझे प्यार की जिंदगी देनेवाले, कभी गम न देना खुशी देनेवाले’, ‘उड़े जब-जब जुल्फें तेरी’, सइयां ले गई जिया तेरी पहली नजर’, ‘ये परदा हटा दो, जरा मुखड़ा दिखा दो’, ‘सजना सजना ओ सजना, तेरे प्यार में खो गई मैं सजना’, और जब प्रेम सफल नहीं होता तो उस पर लिखा कि तेरी दुनिया से हो के मजबूर चला, मैं बहुत दूर, बहुत दूर, बहुत दूर चला’ या ‘सब कुछ लुटा के होश में आए तो क्या किया, दिन में अगर चराग जलाए तो क्या किया’। अपने ३० वर्षों के फिल्मी वैâरियर में २०० से ज्यादा गीत लिखनेवाले प्रेम धवन का यह गीत देश के अलगाववादियों पर एक तमाचा है। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद ३७० तथा ३५ए के हटने के बाद वहां के लोगों पर यह गीत बिल्कुल ठीक बैठ रहा है। ‘छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी, नए देश में नए वेश में लिखेंगे नई कहानी, हम हिंदुस्थानी-हम हिंदुस्थानी।