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बाकी था भर्तियों का दाग वह भी लग गया!

उत्तर प्रदेश में अरसे से अटकी बेसिक शिक्षा विभाग के ६९००० शिक्षकों की भर्ती पर घोटालों का ग्रहण लग गया है। पहले गलत उत्तर के आधार पर कुछ परीक्षार्थी अदालत में गए जहां से इस भर्ती पर रोक लगी। फिर आरक्षित वर्ग की सूची में घालमेल का आरोप सामने आया और अब पैसे लेकर भर्ती कराने वाला गिरोह प्रयागराज में पकड़े जाने के बाद तो पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। मंगलवार को इस शिक्षक भर्ती घोटाले में बड़ा खुलासा हुआ जब परीक्षा का टॉपर भी अरेस्ट किया गया। पुलिस ने प्रयागराज के सोरावं थाना क्षेत्र से शिक्षक भर्ती परीक्षा के टॉपर की गिरफ्तारी की और अभी ५० से ज्यादा अभ्यर्थियों की तलाश है। पता चला है कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में ८ से १० लाख रुपए देकर अभ्यर्थी पास हुए जिसके बाद अब दर्जनों सेंटर पर परीक्षा रद्द हो सकती है।

इस मामले पर चौतरफा हमलों में घिरी यूपी सरकार की ओर से सफाई देने के लिए मंगलवार को बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चन्द्र द्विवेदी सामने आए। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) ने कहा कि ६९००० नौजवानो को शिक्षकों बनाने की भर्ती प्रक्रिया चल रही थी और नियुक्ति पत्र दिए जाने थे। इस बीच पहले हाईकोर्ट की रोक की वजह से भर्ती प्रक्रिया रोकी गई जिसके खिलाफ सरकार डबल बेंच में गई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। राजनीतिक मंशा से आरोप लगाए गए हैं। ज्यादातर पब्लिक डोमेन में आरोप आए हैं। उन्होंने कहा कि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में प्रयागराज के एक केंद्र के प्रबन्धक का गिरोह था। इस सिलसिले में मई में शिकायत दर्ज कराई गई कि पैसे लेकर नौकरी देने का वादा किया गया। शिकायत मई २०२० में की गई जब तक परीक्षा हो चुकी थी। सरकार ने शिकायत को गंभीरता से लिया है और इस मामले में घोटालेबाज केएल पटेल व संतोष बिंद समेत ११ को गिरफ्तार किया गया है। पूरे मामले की जांच एसटीएफ को दे दी गई है।

दरअसल भय व भ्रष्टाचार मुक्त यूपी के नारे के साथ सत्ता में आयी भाजपा सरकार के सामने शिक्षक भर्ती घोटाले के दाग से बरी होकर पाक साफ आने की बड़ी चुनौती है। प्रदेश में बहुचर्चित हो चुके इस शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच प्रदेश सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स को सौंप दी है। यूपी में सभी विपक्षी दल इस भर्ती के खिलाफ मैदान में आ गए हैं। प्रियंका गांधी ने भर्ती में धांधली को लेकर योगी सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए इसे व्यापम घोटाले जैसा करार दिया है। समाजवादी पार्टी मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है कि भर्ती में घोटाले के खिलाफ सपाई सड़क पर उतरेंगे। तमाम सवालों में उलझ चुकी इस भर्ती की उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर अब अभ्यार्थियों ने अदालत का दरवाजा भी खटखटाने की तैयारी कर ली है।

मामले में सबसे पहले प्रयागराज पुलिस ने रविवार को एक गिरोह को दबोचा है जो परीक्षाओं में सेटिंग कर पर्चा आउट कराता था और पैसा लेकर लोगों की भर्ती करवाता था। इस गिरोह में जिन लोगों को पैसा देकर भर्ती होने के आरोप में पकड़ा गया है उनमें से कुछ तो एसे हैं जिन्होंने लिखित परीक्षा में १५० में १४१ नंबर तक पाए हैं। हैरत की बात तो यह है कि इन परीक्षार्थियों के इंटर व स्नातक की परीक्षाओं में नंबर काफी कम हैं। इस गिरोह के पकड़े जाने का खुलासा होने के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। जगह जगह पर अभ्यार्थियों ने आरोप लगाते हुए पूरी भर्ती को रद्द करने व उच्च स्तरीय जांच की मांग करनी शुरु कर दी है।

शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर तमाम आरोप सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। रिजल्ट आने के बाद ही कई अभ्यर्थियों की डिटेल सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी जिनकी परफार्मेंस एकैडेमिक परीक्षाओं में खाफी खराब थी पर उन्होंने लिखित परीक्षा में खासे अंक पा लिए थे। अर्चना तिवारी नामक की छात्रा को अन्य पिछड़ा वर्ग में चयनित होने व एक अन्य सामान्य जाति के अभ्यर्थी के अनुसूचित जनजाति के कोटे में चयनित होने की भर्ती शीट भी वायरल हुई। कुछ ऐसे सफल लोगों के नाम वायरल हुए जिन्होंने एक ही सेंटर पर परीक्षा दी और एक ही परिवार के थे व उन सबको सफलता मिल गई। पुलिस के खुलासे के बाद अभ्यर्थी बाकी आरोपों की जांच की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर भर्ती को पूरी कराने को लेकर अपनी पीठ ठोंक रही योगी सरकार ने एक आदेश जारी कर सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार करने वालों पर कारवाई के लिए कहा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने अपनी शिकायत पुलिस के सायबर सेल को भेजी है।

भर्ती घोटाले पर सबसे ज्यादा मुखर रहीं प्रियंका गांधी ने कहा कि ६९००० शिक्षक भर्ती घोटाला उप्र का व्यापम घोटाला है। इस मामले में गड़बड़ी के तथ्य सामान्य नहीं हैं। कांग्रेस महासचिव ने अपने ट्वीट में कहा कि डायरियों में स्टूडेंट्स के नाम, पैसे का लेनदेन, परीक्षा केंद्रों में बड़ी हेरफेर, इन गड़बड़ियों में रैकेट का शामिल होना – ये सब दर्शाता है कि इसके तार काफी जगहों पर जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि मेहनत करने वाले युवाओं के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। सरकार अगर न्याय नहीं दे सकी तो इसका जवाब आंदोलन से दिया जाएगा। इसी सोमवार दोपहर इस पूरे मसले पर यूपी कांग्रेस की ओर से प्रेस कांप्रâेंस हुई जिसमें एमएलसी दीपक सिंह ने कहा कि ६९ हज़ार शिक्षक भर्ती व्यापम की तरह बड़ा घोटाला है। भाजपा ने चुनाव से पहले घोषणा किया था कि युवाओं को रोजगार देगी लेकिन सरकार ने युवाओं के साथ धोखाधड़ी किया है। इस पूरी भर्ती को रद्द किया जाए और इसकी उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।

कांग्रेस महासचिव वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार के संरक्षण में गिरोह चल रहा है जो इस शिक्षक भर्ती में युवाओं के साथ धोखाधड़ी किया। उन्होंने कहा कि यह सैकड़ों करोड़ रुपए का घोटाला है। भाजपा को बताना चाहिए कि क्या ऐसे घोटालों से वह चुनाव का पैसा इकठ्ठा कर रही है? वीरेंद्र चौधरी ने कहा कि केएल पटेल जोकि शिक्षा माफिया है, इस भर्ती में इलाहाबाद में उसकी भूमिका सामने आई है और केएल पटेल तो छोटी मछली हैं। जांच होगी तो बड़े बड़े लोग सामने आएंगे। प्रदेश कांग्रेस महासचिव मनोज यादव ने कहा कि एमआरसी की प्रक्रिया से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का भारी नुकसान हुआ है। यह सरकार सामाजिक न्याय की हत्या करने पर उतारू है। तमाम जिलों से सूची में फेरबदल किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार दलितों पिछड़ों के हक़ पर डाका डाल रही है।

उधर इस ६९००० शिक्षक भर्ती में मंगलवार को फिर एक नया मोड़ आ गया जब सुप्रीम कोर्ट ने ३७३३९ पदों की भर्ती पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी एक याचिक में शिक्षामित्रों की तरफ से ३७३३९ पदों को होल्ड करने की मांग की गयी थी। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ६९००० शिक्षक भर्ती कटऑफ मामले में ३७३३९ पद रोक कर भर्ती की जाए। इस मामले की अगली सुनवाई १४ जुलाई २०२० को होगी। गौरतलब है कि भर्ती पर ३ जून को लखनऊ हाईकोर्ट ने पहले ही स्टे लगा रखा है। बुधवार को इस मामले में हाईकोर्ट डबल बेंच से फैसला आना है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक अगर डबल बेंच भर्ती से स्टे हटा भी लेती है तो ३७३३९ पदों को रोक कर ही भर्ती होगी।