बाप्पा प्रदूषण से खफा, पैर जमीं नहीं…

मुंबई और ठाणे में बढ़ रही गंदगी से बाप्पा भी खफा नजर आ रहे हैं। बुधवार के दिन ठाणे शहर में बाप्पा का आगमन तो धूमधाम से हुआ लेकिन बाप्पा मानव भक्तों से इस कदर नाराज हैं कि उन्होंने अपने दोनों पैरों को जमीन पर नहीं रखा। जब बाप्पा की नाराजगी का कारण जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि बाप्पा ने अपने दोनों पैरों को धरती पर इसलिए नहीं रखा हैं। उन्हें पर्यावरण से बहुत लगाव है और मानव जाति दिन-ब-दिन पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है इसलिए प्रदूषण से नाराज बाप्पा ने धरती पर कदम नहीं रखा।
बाप्पा का आगमन मुंबई सहित ठाणे शहर में हो चुका है। भक्त ढोल-ताशों और गुलाल की चादर पर बाप्पा का स्वागत कर रहे हैं। सभी मंडल अपने-अपने बाप्पा के स्वागत में जुटे हैं। साथ ही मंडलों ने अपना अलग-अलग थीम बनाया है। मंडलों का यह थीम जनता को कुछ संदेश दे रहा है। ऐसे में ठाणे शहर के वागले इस्टेट के ’बाल मित्र मंडल’ ने २८ वर्षों से चली आ रही प्रथा के अनुसार वागले के विघ्नहर्ता को उनकी गद्दी पर बिठाया है। ’बाल मित्र मंडल’ के कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस बार का उनका थीम यह है कि जनता की गंदगी से बाप्पा नाराज हैं यदि बाप्पा की नाराजगी दूर करनी है तो प्रदूषण करना बंद कर दो और पर्यावरण से प्रेम करना शुरू कर दो। ’बाल मित्र मंडल’ के अध्यक्ष और ठाणे मनपा के समन्वय समिति के अध्यक्ष समीर सावंत ने बताया कि पिछले २८ वर्षों से हम बाप्पा का आगमन और स्वागत तथा विदाई करते हैं। इस बार का हमारा थीम अलग हैं, जिसमें बाप्पा प्रदूषण से नाराज होकर अपना पैर धरती पर नहीं रख रहे हैं।
विरार के मनवेलपाड़ा के रहनेवाले प्रकाश ठाकुर ने बताया कि वे पिछले ३ वर्षों से अपने घर में बाप्पा को आदर-सत्कार से लाते हैं। इस दफा उन्होंने दोस्तों और रिश्तेदारों को व्हॉट्सऐप के जरिए सूचित किया है कि बाप्पा को चढ़ावे में केवल किताबें, पेन और पुराने कपड़े चढ़ाएं। ठाकुर का कहना है कि दोस्तों व रिश्तेदारों द्वारा जमा होनेवाला सामान मनपा में जमा कर देंगे और उसकी एक रसीद मनपा से ले लेंगे, जिसके बाद मनपा उन वस्तुओं को जरूरतमंद बच्चों में बांट देगी।