बारिश का कहर!

मुंबई सहित ठाणे, पालघर और रायगड जिले में पिछले तीन दिनों से इस तरह बारिश हो रही है मानो आसमान फट गया हो। इन तीन दिनों में मुंबई में १ हजार ३६३ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। मुंबई के आसमान से कितना पानी बरसा है, इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है। सिर्फ मंगलवार की सुबह के ३ घंटों का विचार किया जाए तो कुलाबा में ४० मिलीमीटर, दादर में ६३ मिलीमीटर, अंधेरी में ४१ मिलीमीटर, बोरीवली में ६० मिलीमीटर और पनवेल में ६१ मिलीमीटर तक बारिश की बैटिंग हुई है। ठाणे-पालघर और रायगड जिले के वसई, विरार, नालासोपारा, कर्जत, कल्याण, डोंबिवली, पालघर जैसे सभी क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। सोमवार सुबह तक सिर्फ वसई में १ हजार ३४३ मिलीमीटर बरसात हुई। कुछ वर्ष पूर्व हुए ‘२६ जुलाई’ के आसमानी कहर को मुंबईकर भूल नहीं पाए हैं। सौभाग्य से उतनी भीषण स्थिति इस बारिश में फिलहाल नहीं बनी, फिर भी उस आपदा का स्मरण हुए बिना नहीं रहा जा सकता है। मगर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगातार ३ दिनों तक मूसलाधार बारिश होने के बावजूद मुंबई ठप नहीं हुई, मुंबई ‘दौड़नेवाला’ शहर है। इसलिए लगातार होनेवाली पर्जन्य से शहर की स्थिति धीमी तो होगी ही, जनजीवन अस्त-व्यस्त होगा ही। मुंबई की लाइफलाइन कही जानेवाली लोकल गाड़ियों की गति का कम होना, कुछ क्षेत्रों में पानी का जमा होना, सड़क पर ट्रैफिक जाम होने जैसी समस्याएं मुंबई के लिए नई नहीं हैं। उस पर मात करने के लिए मुंबई महानगरपालिका और अन्य मशीनरियां हमेशा मुस्तैद रहती हैं। इसके अलावा बरसात की फांस में मुंबई जब प्रत्यक्ष रूप से फंसती है तो ये मशीनरियां उस समय भी दिन-रात कार्यरत रहती हैं। मुंबई को जलापूर्ति करनेवाले विहार और तुलसी तालाब में जितना जल संचय होता है, उससे अधिक पानी की पिछले ३ दिनों में मुंबई महानगरपालिका की मशीनों ने निकासी की है इसीलिए मुंबई ठप नहीं हुई। ऐसे समय मुंबई की बारिश और महानगरपालिका के नाम पर उंगली तोड़नेवालों को ये बात ध्यान में रखनी होगी। हालांकि मुंबई, ठाणे, रायगड, पालघर जिले में बारिश का कहर जारी है, कोकण किनारों की हरियाली बारिश में पूर्णत: नहा चुकी है। फिर भी राज्य के कई क्षेत्रों में मॉनसून नहीं पहुंचा है और कई जिलों को तो आज भी मॉनसून का इंतजार है। विदर्भ के गोंदिया और बुलढाणा वगैरह क्षेत्र सूखे पड़े हैं। ठाणे और रायगड में हुई मूसलाधार बरसात अभी तक नासिक पर मेहरबान नहीं हुई है। पिछले वर्ष नासिक में काफी बरसात हुई थी। इतना ही नहीं, उसके कारण मराठवाड़ा का जायकवाड़ी बांध कई वर्षों बाद भरा था। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में इगतपुरी, त्र्यंबकेश्वर को छोड़ दिया जाए तो नासिक जिला सूखा ही है। इसलिए खरीफ के नियोजन पर पुनर्विचार करने की नौबत किसानों पर आ सकती है। उत्तर महाराष्ट्र को भी अभी तक बारिश का इंतजार है। मराठवाड़ा में नांदेड, लातूर, धाराशीव, बीड, हिंगोली जिले में काफी अच्छी बरसात हुई है। फिर भी अन्य क्षेत्रों में बादलों के उमड़ने-घुमड़ने का माहौल और ठंडी हवाओं पर ही लोगों को संतोष करना पड़ रहा है। संभाजीनगर और जालना जिले में १५ प्रतिशत ही बरसात होने से जुलाई का आधा माह बीतने के बावजूद वहां टैंकर के जरिए जलापूर्ति जारी है। वहां बुआई की स्थिति भी विकट है। पश्चिम महाराष्ट्र में भी कुछ जिलों पर कृपा तो कुछ जिलों पर अवकृपा जैसी स्थिति है। महाराष्ट्र में मॉनसून की कुछ स्थिति इस तरह मिश्रित है। हालांकि यह प्रारंभिक तस्वीर है। कल यह सुधर भी सकती है। फिलहाल मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगड जिले में बारिश ने जो कहर बरपाया है तथा मौसम विभाग ने जिस अतिवृष्टि की चेतावनी दी है, उस बारे में सरकार, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा मशीनरियों को सतर्क रहना जरूरी होगा।